जब आप किसी ऐप या वेबसाइट पर नया डेबिट या क्रेडिट कार्ड जोड़ते हैं, तो अक्सर आपके खाते से 1 रुपया कटता है। कई बार लोग इसे फ्रॉड मान लेते हैं और कई लोगों को लगता है कि यह कोई चार्ज है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। यह एक सामान्य और सेफ प्रोसेस होता है, जिसका मकसद सिर्फ आपके कार्ड को वेरिफाई करना होता है।
दरअसल, जब आप अपने कार्ड की डिटेल डालते हैं, तो पेमेंट सिस्टम बैंक से यह जांच करता है कि आपका कार्ड एक्टिव है या नहीं और उससे ट्रांजैक्शन हो सकता है या नहीं। इस जांच के लिए 1 रुपये के छोटी से अमाउंट का इस्तेमाल किया जाता है। अगर बैंक इसे मंजूर कर देता है, तो इसका मतलब होता है कि आपका कार्ड सही है और आगे के ट्रांजेक्शन के लिए तैयार है।
तकनीकी भाषा में कहे तो इसे प्री-ऑथराइजेशन कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपसे सही मायने में पैसे लिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक अस्थायी होल्ड होता है, जो कुछ समय बाद अपने आप वापस हो जाता है। ज्यादातर मामलों में यह रकम कुछ मिनटों या घंटों में वापस आ जाती है, हालांकि कभी-कभी बैंक के प्रोसेस के कारण इसमें 1-2 दिन भी लग सकते हैं।
यह प्रोसेस सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी होता है। इससे गलत या फर्जी कार्ड डिटेल्स के इस्तेमाल की संभावना कम हो जाती है। साथ ही इससे यह भी तय होता है कि आगे चलकर पेमेंट करते समय कोई दिक्कत नहीं आएगी।
भारत में आमतौर पर 1 रुपये का ही टेस्ट ट्रांजैक्शन किया जाता है, लेकिन कुछ प्लेटफॉर्म या कार्ड के हिसाब से यह राशि थोड़ी ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि इसका मकसद हमेशा एक ही होता है। सिर्फ कार्ड की जांच करना, न कि आपसे पैसा लेना।
इसलिए अगर आपको कार्ड जोड़ते समय 1 रुपये कटता दिखे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह एक सेफ प्रोसेस है और आपकी रकम अपने आप वापस आ जाती है।