Silver Price: ज्वेलरी या इंडस्ट्रियल डिमांड नहीं, इस वजह से बढ़ रहे चांदी के दाम; एक्सपर्ट ने किया आगाह
Silver Price: 2025 के बाद 2026 में भी चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल रही है। लेकिन, इस तेजी ज्वेलरी या इंडस्ट्रियल डिमांड से नहीं है। जानिए चांदी की कीमतों में किस वजह से तेजी आई है और एक्सपर्ट क्यों निवेशकों को सजग रहने की सलाह दे रहे हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, चांदी की मौजूदा तेजी पूरी तरह निवेश के भरोसे है।
Silver Price: चांदी की कीमतों में 2025 में रिकॉर्ड तोड़ तेजी आई, जो 2026 में भी बदस्तूर जारी है। लेकिन, इस तेजी का सबसे बड़ा कारण ज्वेलरी या इंडस्ट्रियल डिमांड नहीं, बल्कि निवेशकों की जबरदस्त खरीदारी है। साल 2025 में भारत ने करीब 7,000 टन चांदी का आयात किया। क्योंकि निवेशक बड़े पैमाने पर पेपर और फिजिकल- दोनों तरीकों से चांदी में पैसा लगा रहे हैं।
चांदी ने कितना दिया है रिटर्न
चांदी की कीमतों में बुधवार को गिरावट आई। चांदी का शाम 6.10 बजे तक MCX पर भाव करीब 6000 रुपये की गिरावट के साथ 2.52 लाख रुपये प्रति किलो थी। इस गिरावट के बावजूद चांदी ने पिछले 1 साल में काफी बंपर रिटर्न दिया है।
पिछले एक हफ्ते में चांदी करीब 15 प्रतिशत मजबूत हुई है, जबकि बीते एक महीने में इसमें लगभग 40 प्रतिशत की बड़ी तेजी दर्ज की गई है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी करीब 13 प्रतिशत ऊपर चल रही है। अगर पूरे साल 2025 की बात करें, तो चांदी की कीमतों में करीब 148 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया था।
ज्वेलरी डिमांड धीमी, निवेश बना सहारा
Metals Focus में साउथ एशिया के प्रिंसिपल कंसल्टेंट चिराग शेट्टी के मुताबिक, कीमतें ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बावजूद खरीदारी का जोश कम नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि चांदी की मौजूदा तेजी पूरी तरह निवेश के भरोसे है। चांदी के नए इस्तेमाल को लेकर बनी कहानियों ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया है। इसके उलट, भारत में ज्वेलरी और सिल्वरवेयर जैसे पारंपरिक सेगमेंट्स में मांग कमजोर पड़ती दिख रही है।
ETF और भारी सिल्वर बार की जमकर खरीद
निवेश की यह दिलचस्पी हर स्तर पर देखने को मिल रही है। एक तरफ सिल्वर ETF में लगातार इनफ्लो आ रहा है, तो दूसरी तरफ बड़े फिजिकल सिल्वर बार की खरीद भी तेज है।
खासतौर पर हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ निवेशक 15 किलो और 30 किलो के सिल्वर बार बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं। यह दिखाता है कि निवेशक चांदी को एक मजबूत लॉन्ग टर्म एसेट मान रहे हैं।
तेजी की रफ्तार ने बाजार को चौंकाया
चिराग शेट्टी के मुताबिक, चांदी की कीमतें जिस रफ्तार से बढ़ीं, उसने बाजार के कई एक्सपर्ट्स को भी चौंका दिया। जिन टारगेट्स को पहले 2026 के लिए देखा जा रहा था, वे काफी पहले ही पूरे हो गए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्तरों के बाद डिमांड का नेचर बदल सकता है।
महंगी चांदी से सब्स्टीट्यूशन का खतरा
उन्होंने चेताया कि ऊंची कीमतों पर सब्स्टीट्यूशन एक बड़ा जोखिम बन सकता है। जैसे-जैसे चांदी महंगी होगी, इंडस्ट्रीज कॉपर या निकल जैसे सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकती हैं।
कुछ सेक्टर्स में इसकी शुरुआत दिखने लगी है। सोलर सेक्टर में भी सिल्वर पेस्ट और पाउडर के लिए सस्ते विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि किस कीमत पर चांदी का इस्तेमाल आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह जाता।
ग्लोबल पॉलिसी तय करेगी आगे की चाल
चिराग शेट्टी के मुताबिक, ग्लोबल पॉलिसी से जुड़े घटनाक्रम भी चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं। अमेरिका में संभावित Section 232 टैरिफ और उससे जुड़े ट्रेड फैसले बाजार पर असर डाल सकते हैं। ये पहली तिमाही यानी मार्च तक सामने आ सकते हैं।
हालांकि, शेट्टी ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में आई तेज तेजी को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
फिजिकल सिल्वर मार्केट पर रेगुलेशन जरूरी
घरेलू बाजार की बात करें तो चिराग शेट्टी ने फिजिकल सिल्वर मार्केट में मजबूत रेगुलेशन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भले ही पिछले दस साल में शुद्धता के मानकों में सुधार हुआ हो, लेकिन यह बाजार अब भी काफी हद तक अनऑर्गनाइज्ड है। इसमें अनिवार्य हॉलमार्किंग नहीं है।
शेट्टी का कहना है कि चांदी की कीमतें अब जिस स्तर पर पहुंच चुकी हैं, उसे देखते हुए गोल्ड की तरह कंपलसरी हॉलमार्किंग जरूरी हो गई है। ताकि ग्राहकों के हितों की रक्षा हो और बाजार में पारदर्शिता बढ़े।
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