दिवाली पर क्यों खुलता है शेयर बाजार? जानिए मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा और 'चोपड़ा पूजन' से जुड़ी ये दिलचस्प कहानी

Muhurat Trading 2026: दिवाली के दिन जब पूरा देश जश्न मनाता है, तब शेयर बाजार में 1 घंटे के लिए 'मुहूर्त ट्रेडिंग' का आयोजन होता है। आखिर 1957 में बीएसई से शुरू हुई इस अनोखी परंपरा के पीछे 'चोपड़ा पूजन' और मां लक्ष्मी के आशीर्वाद की क्या कहानी है? इस साल 8 नवंबर 2026 को दोपहर 2:20 बजे शुरू होने वाले इस खास सत्र की टाइमिंग, इतिहास और निवेश से जुड़ी जरूरी सावधानियों को जानिए

अपडेटेड Oct 21, 2026 पर 10:58 AM
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मान्यता ये है कि इस शुभ समय में किया गया निवेश साल भर समृद्धि और धन-लाभ लेकर आता है

Muhurat Trading 2026 Details & History: भारत में दिवाली केवल दीपों और खुशियों का पर्व नहीं है, बल्कि शेयर बाजार के निवेशकों और व्यापारियों के लिए एक बेहद शुभ अवसर भी है। हर साल दिवाली के दिन भारतीय शेयर बाजार (BSE और NSE) नियमित कारोबार के लिए बंद रहते हैं, लेकिन शाम को एक विशेष 'मुहूर्त ट्रेडिंग' सत्र का आयोजन किया जाता है। हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, इस शुभ समय में किया गया निवेश साल भर समृद्धि और धन-लाभ लेकर आता है।

मुहूर्त ट्रेडिंग 2026: जानिए तारीख और समय

इस साल दिवाली के अवसर पर मुहूर्त ट्रेडिंग का विशेष सत्र रविवार, 8 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।


मुख्य ट्रेडिंग सत्र: दोपहर 2:20 बजे से अपराह्न 3:30 बजे तक (कुल 1 घंटा)

प्री-ओपनिंग सेशन: दोपहर 2:05 बजे से दोपहर 2:20 बजे तक

इस एक घंटे के विशेष ट्रेडिंग विंडो में निवेशक इक्विटी, कमोडिटी, करेंसी और डेरिमेंटिव्स में नए ट्रेड और निवेश की शुरुआत करते हैं।

कब और कैसे हुई मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत?

भारतीय शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है:

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE): बीएसई में मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत साल 1957 में हुई थी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE): एनएसई ने इस परंपरा को साल 1992 से अपनाना शुरू किया।

डिजिटल ट्रेडिंग और डीमैट खातों से पहले के दौर में व्यापारी और ब्रोकर्स इस दिन पारंपरिक पोशाक पहनकर दलाल स्ट्रीट स्थित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग रिंग में शारीरिक रूप से इकट्ठा होते थे और सौदे दर्ज करते थे।

सांस्कृतिक जड़ें: चोपड़ा पूजन से जुड़ा है इतिहास

मुहूर्त ट्रेडिंग की जड़ें मुख्य रूप से गुजराती और मारवाड़ी व्यापारी समुदायों की पुरानी व्यावसायिक परंपराओं से जुड़ी हैं। दिवाली के दिन व्यापारी अपने पुराने बही-खातों को बंद करके नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करते थे और 'चोपड़ा पूजन' का अनुष्ठान करते थे। इस पूजा में धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया जाता था।

शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग इसी पारंपरिक अनुष्ठान का एक आधुनिक और डिजिटल रूप बनकर उभरी है, जिसे निवेशक नए संवत की शुभ शुरुआत मानते हैं।

निवेशकों के लिए जरूरी सलाह: सावधानी है जरूरी

चूंकि यह विशेष ट्रेडिंग सत्र केवल एक घंटे के लिए होता है, इसलिए बाजार में कम समय के भीतर काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैसे आपको बता दें कि मुहूर्त ट्रेडिंग में केवल शुभ मुहूर्त में निवेश की परंपरा है। यह किसी भी तरह से मुनाफे की गारंटी नहीं देती। इसलिए, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के भावुक या जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही सोच-समझकर निवेश करें।

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