वेस्ट एशिया में जारी तनाव और एलपीजी सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच देश में गैस की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खबरें सामने आई थीं कि तेल कंपनियां बैलेंस बनाए रखने के लिए घरेलू सिलेंडर में कम गैस भर सकती हैं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन दावों को अफवाह बताया है। ऐसी खबरें आ रही थी अब गैस सिलेंडर में 14 किलोग्रांम की जगह 10 किलोग्राम गैस भरी जाएगी। लेकिन सरकार ने इस खबर को अफवाह बताया है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ कहा है कि 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में 10 किलो गैस देने जैसी कोई योजना फिलहाल लागू नहीं की गई है। हालांकि, कुछ तेल कंपनियों ने माना है कि इस तरह का प्रस्ताव सरकार के पास विचार के लिए भेजा गया है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार ही लेगी।
सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। रिफिल बुकिंग भी अब करीब 50 लाख के आसपास आ गई है, जो पहले की तुलना में कम है। इसके साथ ही देश में एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे अब 50 से 60 फीसदी जरूरतें घरेलू स्तर पर ही पूरी हो रही हैं।
वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष का असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ रहा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत अपनी करीब 60 फीसदी एलपीजी जरूरतें आयात से पूरी करता है, ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट का असर पड़ सकता है।
फिलहाल कुछ गैस जहाज रास्ते में हैं या खाड़ी क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है। सरकार का फोकस घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने पर है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।