आज 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर हर महिला को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उनकी बचत को बड़ी संपत्ति में बदलने के लिए कई खास योजनाएं शुरू की हैं। ये 7 प्रमुख योजनाएं न सिर्फ वित्तीय सुरक्षा देती हैं बल्कि महिलाओं को सीधे पैसे, लोन, बचत विकल्प और रोजगार के अवसर भी प्रदान करती हैं। इन योजनाओं का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये सरकारी गारंटी के साथ आती हैं, यानी निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और जोखिम की चिंता नहीं होती।
छोटी बचत से बड़ी संपत्ति बनाने, स्वरोजगार शुरू करने या परिवार की मदद करने के लिए महिलाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं। चाहे स्वास्थ्य, शिक्षा या व्यापार, ये योजनाएं हर क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देती हैं।
महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन’ योजना का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाना और परिवार में उनकी अहमियत बढ़ाना है। 21 से 65 साल की योग्य महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के जरिए दिए जाते हैं।
ओडिशा सरकार की सुभद्रा योजना महिलाओं को सालाना आर्थिक मदद देती है। एलिजिबल महिलाओं को हर साल 10,000 रुपये दो किश्तों में मिलते हैं, जबकि अधिकतम 50,000 रुपये तक की सहायता भी प्रदान की जा सकती है।
मध्य प्रदेश की CM लाडली बहना योजना शादीशुदा, विधवा या तलाकशुदा महिलाओं को सीधे उनके बैंक अकाउंट में 1,500 रुपये प्रति माह देती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत शुरू की गई थी। यह योजना माता-पिता और गार्जियन को अपनी बेटियों की शिक्षा और शादी के लिए सुरक्षित बचत का अवसर देती है। आकर्षक 8.2% ब्याज और टैक्स बेनिफिट के साथ यह योजना निवेशकों के लिए फायदे का सौदा है।
लखपति दीदी स्कीम स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को सशक्त बनाती है। इन महिलाओं के परिवार सालाना 1 लाख रुपये से अधिक कमा सकते हैं। यह योजना फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, कॉन्फिडेंस और कम्युनिटी लीडरशिप को बढ़ावा देती है।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत महिलाएं बिना गारंटी के 50,000 रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन लेकर अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। कई महिलाओं ने इस योजना के जरिए बुटीक, ब्यूटी पार्लर, दुकान या उद्योग स्थापित किए हैं।
बिहार की जीविका दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार देती है। इसमें महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए 10,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता और कारोबार बढ़ाने के लिए 2 लाख रुपये तक का अनुदान या ऋण मिलता है। अब तक करीब 1 करोड़ महिलाओं को इस योजना से फायदा मिल चुका है।