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छोटी-सी वसीयत बचा सकती है बड़ी परेशानियों से

अपने वित्तीय व्यवहार कम से कम एक विश्वसनीय व्यक्ति को भी बताकर रखें।

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 24, 2011 पर 2:32 PM
छोटी-सी वसीयत बचा सकती है बड़ी परेशानियों से

hindimoneycontrol.com


जयंत श्रीवास्तव (66) (काल्पनिक पात्र) अपने परिवार के साथ जबलपुर में रहते हैं। हाल ही में जयंत के मित्र हेमंत का देहावसान हो गया। हेमंत ने अपनी वसीयत नहीं लिखी थी। वसीयत नहीं होने के कारण हेमंत के परिवार में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।


जयंत ने मध्यस्थता कर परिवार के विवाद को सुलझा दिया, परंतु वसीयत नहीं होने के कारण परिवार को कुछ प्रॉपर्टी के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना होगा। सक्सेशन सर्टिफिकेट लेने में उन्हें प्रॉपर्टी के मूल्य का ८% से १०% तक का खर्च आएगा। इन हालातों को देखते हुए जयंत ने अपनी वसीयत बनवाने का विचार किया। इस संदर्भ में जयंत फाइनेंशियल प्लानर से मिले। फाइनेंशियल प्लानर एवं जयंत की बातचीत के अंश निम्न प्रकार हैं-


फाइनेंशियल प्लानर- आपके परिवार में कौन-कौन हैं?
जयंत- मेरी पत्नी संगीता (62), मेरा बड़ा बेटा रमन (38), उसकी पत्नी साक्षी (35), उनका बेटा राघव (10), मेरा छोटा बेटा आदित्य (32), उसकी पत्नी पल्लवी (30), उनकी बेटी रानी (3)।


फाइनेंशियल प्लानर- क्या आपकी बेटी भी है?
जयंत- हाँ, मेरी एक बेटी सोनल (34) है। उसका विवाह हो चुका है।


फाइनेंशियल प्लानर- क्या आपने अपनी संपत्ति का विवरण तैयार कर रखा है?
जयंत- जी हाँ, वर्तमान में मेरे पास एक मकान, एक खेती की जमीन, विभिन्न बैंक एफडी, बैंक सेविंग खाते एवं कुछ जवाहरात हैं।


फाइनेंशियल प्लानर- आप अपनी संपत्ति की कैसे वसीयत करना चाहते हैं?
जयंत- मकान, खेती की जमीन एवं बैंक एफडी बड़े बेटे रमन के नाम, जवाहरात दोनों पुत्रवधू एवं बेटी को बराबर देना चाहता हूँ। सेविंग खाते की राशि पोते-पोती को देना चाहता हूँ। मैं अपने छोटे बेटे को हाल ही में फ्लैट दिला चुका हूँ अतः वर्तमान संपत्ति में से कुछ नहीं देना चाहता हूँ एवं पत्नी के नाम पर्याप्त एफडी है।


फाइनेंशियल प्लानर- क्या आपकी पत्नी ने वसीयत बना रखी है?
जयंत- मेरी पत्नी के पास सिर्फ बैंक एफडी ही है। जो एफडी वह छोटे बेटे को देना चाहती है उसमें छोटा बेटा ज्वॉइंट हो रहा है एवं जो एफडी वह बेटी को देना चाहती है उसमें बेटी के नाम नॉमिनेशन कर दिया है अतः उसकी वसीयत लिखने की आवश्यकता नहीं है।


फाइनेंशियल प्लानर - क्या आप जानते हैं नॉमिनेशन करने से एवं ज्वॉइंट होल्डर बनाने से केवल इतना फायदा है कि बैंक उनकी मृत्यु के बाद नॉमिनी एवं ज्वॉइंट होल्डर को एफडी की रकम दे देगी। परंतु नॉमिनी एवं ज्वॉइंट होल्डर वह रकम केवल ट्रस्टी की हैसियत से ही रख पाएँगे एवं अन्य वारिस यदि माँग करते हैं तो उन्हें उनका हिस्सा देना होगा।
जयंत- हम तो समझ रहे थे कि हमने नॉमिनेशन कर दिया है तो वसीयत लिखने की आवश्यकता नहीं है। इसका मतलब है कि भविष्य में परिवार में कोई विवाद न हो इसके लिए मेरी पत्नी को भी वसीयत लिख लेना चाहिए।


फाइनेंशियल प्लानर - जी हाँ, अच्छा यह बताइए आपके दोनों बेटे वर्तमान में कौन-सी टैक्स स्लैब में हैं?
जयंत- बड़ा बेटा 20% एवं छोटा बेटा 30% की दर से टैक्स अदा कर रहा है।


फाइनेंशियल प्लानर - ऐसे में आपको वसीयत के तहत अपने बेटों की टैक्स प्लानिंग भी सही रूप से करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में आपके बेटों पर टैक्स का भार कम रहे।
जयंत- क्या वसीयत के तहत ऐसा संभव है?


फाइनेंशियल प्लानर- जी हाँ।
जयंत- तो फिर आप मेरी और मेरी पत्नी को वसीयत ड्राफ्ट कर दीजिए।


फाइनेंशियल प्लानर ने वसीयत ड्राफ्ट करने के साथ निम्न सलाह भी दी-


* सभी बैंक अकाउंट, एफडी, लॉकर में नॉमिनेशन चेक कर अपडेट करने की सलाह दी।


* सभी संपत्तियों के दस्तावेज की छायाप्रति एवं उनकी विस्तृत जानकारी एक फाइल में रखने की सलाह दी एवं यह भी कहा कि इसे हर 3-6 माह में अपडेट करते रहें। साथ ही फाइल पर अपडेट किए जाने की दिनांक भी लिखने को कहा।


* अपने वित्तीय व्यवहार कम से कम एक विश्वसनीय व्यक्ति को भी बताकर रखने की सलाह दी। जयंत ने फाइनेंशियल प्लानर से हुई चर्चा के बारे में अपनी पत्नी एवं दोनों बेटों को भी बताया। साथ ही दोनों बेटों को भी उनकी वसीयत बनाने का सुझाव दिया।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।

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