श्री सुधीर अग्रवाल (परिवर्तित नाम) अपने फाइनेंशियल प्लान का विश्लेषण करने के लिए हमारे ऑफिस आए। अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में ऐसी विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये खर्च किए हैं जो उनका सपना था। जब उनसे पूछा गया कि किस तरह उन्होंने ये पैसे जुटाए हैं तो पता चला कि ये पैसा उनकी बेटी की प्राइमरी शिक्षा पर खर्च करने के लिए रखा गया था जिसे फिजूल में ही कम महत्वपूर्ण चीज पर खर्च कर दिया गया।
कई बार एक फाइनेशियल प्लानर के रूप में हमें ऐसे सवालों का सामना करना पड़ता है कि हमने अपने सारे पैसे खर्च कर दिए हैं और अब हमें आर्थिक संकट से निकलने का रास्ता बताइये। ये ठीक उसी प्रकार है कि आप किसी डाइटीशियन के पास जाकर कहें कि मैं सब कुछ खाना चाहता हूं और मेरा वजन भी कम होना चाहिए। जान लें कि फाइनेंशियल प्लानर कोई जादूगर नहीं हैं। वो ग्राहक की जरूरतों के मुताबिक काम करते हैं और इसके बदले में ग्राहकों को भी अपनी प्राशमिकताएं तय करनी चाहिए और अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए अनुशासित रुप से खर्च करना चाहिए।
प्राथमिकता तय करें- अपना कार्ड स्वाइप करने या आननफानन में पैसा खर्च करने से पहले सोचें कि ये पैसा किसके लिए बचाया गया था। इससे आप अनावश्यक पैसा खर्च करने से बच सकते हैं।
प्लानर को सारी आर्थिक जानकारी दें- ठीक डॉक्टर की ही तरह फाइनेंशियल प्लानर को भी सारी जानकारी दी जानी चाहिए। अपने फाइनेंशियल प्लानर को अपने लक्ष्यों, जरूरतों, आपकी मौजूदा आर्थिक स्थिति के बारे में बताना चाहिए जिससे वो आपके लिए एक आदर्श फाइनेंशियल प्लान बना सके।
सिर्फ फाइनेंशियल प्लान बनाना ही काफी नहीं- सिर्फ प्लान बनाने से काम नहीं चलता, इसे सही तरीके से चलाना और इसके मुताबिक निवेश रणनीति बनाना जरूरी है।
फाइनेंशियल प्लान आपके निवेश लक्ष्यों को पाने का आधार है। ग्राहक और फाइनेंशियल प्लानर मिलकर इसे पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं।
ये लेख स्वाति मुकुंद ने लिखा है जो एमएसवेंचर्स फाइनेंशियल प्लानर्स की एडमिनिस्ट्रेटिव हेड हैं।