Adhik Maas Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष व्रत को हिंदू धर्म में पुण्यकारी माना जाता है। यह व्रत हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत का नाम उस दिन से निर्धारित होता है, जिस दिन यह त्रयोदशी तिथि पड़ती है। अलग-अलग दिन में पड़ने वाले प्रदोष का अलग महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह में भी प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाएगा। खास बात यह है कि इस माह में भक्तों को दो की जगह 4 प्रदोष व्रत करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
इस साल ज्येष्ठ में अधिक मास लगने की वजह से यह दुर्लभ संयोग बना है। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस दौरान अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत 28 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाला प्रदोष व्रत सामान्य महीनों की तुलना में अत्यधिक फलदायी माना जाता है।
अधिक मास प्रदोष व्रत तारीख और शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ : 28 मई 2026 को सुबह 07:56 बजे से
त्रयोदशी तिथि का समापन : 29 मई 2026 को सुबह 09:50 बजे तक
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त : शाम को 07:12 PM से रात 09:15 PM तक (अवधि: 2 घंटे 2 मिनट)
ज्येष्ठ अधिक मास प्रदोष व्रत उपाय
अधिकमास के इस पहले प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विशेष आराधना करने से कई तरह के ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है:
चंद्र दोष निवारण : प्रदोष काल (शाम के समय) में शिवलिंग पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें।
शनि दोष से मुक्ति : शिव जी की पूजा करते समय शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
सुख-समृद्धि : चूंकि यह गुरु प्रदोष है, इसलिए इस दिन शिव पंचाक्षरी मंत्र (ऊं नम: शिवाय) या रुद्र मंत्र का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
ज्येष्ठ अधिक मास प्रदोष व्रत महत्व