Akshaya Tritiya 2026 Shubh Yog: गजकेसरी और मालव्य राजयोग सहित 7 दुर्लभ योगों का संयोग लेकर आ रही इस साल की अक्षय तृतीया

Akshaya Tritiya 2026 Shubh Yog: अक्षय तृतीया का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। ये पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल अक्षय तृतीया के पर्व को बेहद खास और मनोकामना पूरी करने वाला बताया जा रहा है। एक ही दिन में कम से कम 7 शुभ योग बन रहे हैं

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 12:58 PM
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अक्षय तृतीया को पूरे समय स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है।

Akshaya Tritiya 2026 Shubh Yog: अक्षय तृतीया का दिन अक्षय फल देने वाला माना जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष स्थान है। हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा, व्रत और विभिन्न उपाय भी करते हैं। माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त का विचार किए कर सकते हैं, क्योंकि इस दिन अबूझ मुहूर्त रहता है। लेकिन, इस साल की अक्षय तृतीया की तिथि बहुत शुभ मानी जा रही है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस दिन गजकेसरी और मालव्य राजयोग सहित 7 शुभ योग बन रहे हैं। आइए जानें अक्षय तृतीया की सही तारीख, अबूझ मुहूर्त क्या है? अक्षय तृतीया के दिन बनने वाले 7 शुभ योग कौन से हैं और उससे क्या लाभ होगा?

अक्षय तृतीया 2026 तिथि कब है?

पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के लिए वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से लेकर 20 अप्रैल को सुबह 7:49 बजे तक है। चूंकि अक्षय तृतीया की तिथि 20 अप्रैल को सुबह 7:49 बजे तक है, इसलिए शुभ योगों की गणना इसके अनुसार है।

अक्षय तृतीया पर बन रहे 7 शुभ योग

अक्षय तृतीया पर 7 शुभ योग बन रहे हैं। इसमें आयुष्मान् योग, सौभाग्य योग, गजकेसरी योग, त्रिपुष्कर योग, रवि योग, मालव्य राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग शामिल हैं।

आयुष्मान योग : प्रात:काल से लेकर रात 08:02 बजे तक रहेगा। यह योग लोगों को उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु देने वाला होता है। लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है।


मालव्य राजयोग : 19 अप्रैल को दोपहर 03:51 बजे शुक्र के वृषभ राशि में गोचर करने से मालव्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह पांच महापुरुष योगों में से एक राजयोग है। इस राजयोग में व्यक्ति को अपार धन, सुख-सुविधा, ग्लैमर, सौंदर्य, ऐश्वर्यपूर्ण जीवन, कलात्मक प्रतिभा आदि प्राप्त होता है।

गजकेसरी राजयोग : ज्योतिष में इस योग को राजयोग के समान माना जाता है। जब चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) एक-दूसरे से केंद्र में होते हैं, तब यह शुभ संयोग बनता है। यह योग इंसान को हाथी (गज) जैसी शक्ति और शेर (केसरी) जैसा साहस देता है।

सौभाग्य योग : रात 08:02 बजे से लेकर 20 अप्रैल को शाम 04:11 बजे तक है। यह योग अत्यंत शुभ होता है। इसके शुभ प्रभाव से सुख, समृद्धि, भाग्य और दांपत्य जीवन के सुखों में वृद्धि होती है।

त्रिपुष्कर योग : सुबह 07:10 बजे से लेकर सुबह 10:49 बजे तक है। इस योग में आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, उसका तीन गुना फल प्राप्त होता है।

रवि योग: 20 अप्रैल को प्रात: 04:35 से प्रात: 05:51 बजे तक है। रवि योग में सूर्य देव का प्रभाव अधिक होता है, जिसमें सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं। इस योग में नया कार्य करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : 20 अप्रैल को पूरे दिन है। इस योग में आप जो भी कार्य करेंगे, उसमें आपके कार्य सफल सिद्ध होंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग नए कार्य, बिजनेस के प्रारंभ के लिए अच्छा है।

क्या होता है अबूझ मुहूर्त?

अक्षय तृतीया को पूरे दिन अबूझ मुहूर्त होता है। अबूझ मुहूर्त का अर्थ यह है कि आपको कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है। अक्षय तृतीया को पूरे समय स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है। पूरे दिन में आप कभी भी कोई काम कर सकते हैं।

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