Akshaya Tritiya 2026: इस साल कब मनाया जाएगा अक्षय तृतीया का पर्व, जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का महत्व

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सोना-चांदी खरीदने को बहुत जरूरी मानते हैं। आइए जानें इस साल ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इस दिन के शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का क्या महत्व है

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 6:46 PM
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अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख के महीने में मनाया जाता है।

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म के सबसे पावन और अक्षय फल देने वाला माना जाता है। देश के कुछ हिस्सों में इस दिन को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि ये दिन इतना शुभ होता है कि इसमें बिना मुहूर्त देखे भी शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। अक्षय तृतीया के दिन लोग बड़ी संख्या में सोना-चांदी, बहुमूल्य रत्न, घर, गाड़ी, दुकान आदि खरीते हैं। इस दिन शादियों के भी काफी मुहूर्त होते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख के महीने में मनाया जाता है। आइए जानें इस साल ये त्योहार किस दिन मनाया जाएगा?

अक्षय तृतीया तारीख

अक्षय तृतीया का त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। 2026 में अक्षय तृतीया रविवार, 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया जब बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में पड़ती है, तो इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

सोना-चांदी खरीदने का मुहूर्त

अक्षय तृतीया पर सोना और चांदी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। 2026 में, सोना और चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त रविवार, 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे शुरू होगा और सोमवार, 20 अप्रैल को सुबह 5:51 बजे तक चलेगा। इससे लगभग पूरा दिन खरीदारी के लिए शुभ रहेगा।

अक्षय तृतीया का महत्व


अक्षय शब्द का अर्थ है 'कभी खत्म न होने वाला।' अक्षय तृतीया सौभाग्य से जुड़ी है और माना जाता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन की गई खरीदारी भी वृद्धि, समृद्धि और सफलता लाती है। यह दिन मंत्र जाप, यज्ञ, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के कार्यों के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

अक्षय तृतीया के दिन के साथ कई पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि त्रेता युग की शुरुआत अक्षय तृतीया को हुई थी, भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था, और भगवान कृष्ण इसी दिन अपने बचपन के दोस्त सुदामा से मिले थे। कुछ परंपराएं महाभारत युद्ध के समापन को भी अक्षय तृतीया से जोड़ती हैं, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

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