Amla Navami 2025: शुभ संयोग और चोर पंचक के बीच कल मनाई जाएगी आंवला नवमी, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि

Amla Navami 2025: आंवला नवमी के दिन से सतयुग की शुरुआत मानी जाती है। इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। दिन किए गए शुभ कार्य और दान-पुण्य का अक्षय फल मिलता है। इस साल आंवला नवमी पर कई दुर्लभ संयोगों के साथ सुबह से ही चोर पंचक की शुरुआत हो रही है।

अपडेटेड Oct 30, 2025 पर 10:46 AM
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी।

Amla Navami 2025: आंवला नवमी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है और भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी। आंवला नवमी को अक्षय नवमी, इच्छा नवमी, कूष्मांड नवमी, आरोग्य नवमी और धातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किये गये व्रत के पुण्य से सुख-शांति, सद्भाव और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और इन कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। इस साल ये पर्व 31 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। आंवला नवमी पर जहां कई शुभ संयोग बन रहे हैं, वहीं सुबह से ही चोर पंचक लग रहा है जो अगले पांच दिन रहेगा। आइए जानें आंवला नवमी का महत्व और इस दिन बन रहे शुभ संयोगों के बारे में

आंवला नवमी तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 30 अक्टूबर को सुबह 10:6 बजे से लगेगी और 31 अक्टूबर को सुबह 10:03 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर आंवला नवमी या अक्षय नवमी 31 अक्टूबर शुक्रवार को होगी। आंवला नवमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 3:31 घंटे का है, जो सुबह 6:32 बजे से प्रारंभ होगा और यह सुबह 10:03 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में आंवला नवमी की पूजा कर लेनी चाहिए। इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:49 बजे से सुबह 05:41 बजे तक है। 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक है।

सुबह से लग रहा चोर पंचक

इस बार आंवला नवमी के दिन सुबह 06:48 बजे से चोर पंचक लग रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक होता है। इसमें वस्तुओं की चोरी की आशंका रहती है।

ये 2 शुभ योग भी बन रहे


इस साल आंवला नवमी पर वृद्धि योग और रवि योग 2 शुभ योग बन रहे हैं। प्रात:काल में वृद्धि योग बनेगा, जो 1 नवंबर को सुबह 04:32 बजे तक रहेगा। इस योग में आप जो शुभ कार्य करेंगे, उसके फल में वृद्धि होगी। वहीं, रवि योग पूरे दिन रहेगा। इसमें सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं। इसके अलावा, आंवला नवमी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 06:51 बजे तक है। इसके बाद से शतभिषा नक्षत्र है।

आंवला नवमी का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अक्षय नवमी के दिन कूष्माण्ड नाम के राक्षस के अत्याचारों से सृष्टि को मुक्ति दिलाई थी। इसके बाद उस दैत्य के रोम से कूष्माण्ड यानी पेठा या कद्दू की बेल निकली थी। इसलिए इसे कूष्माण्ड नवमी भी कहते हैं। इस दिन कुष्माण्ड या पेठे का दान करना चाहिए। दान के साथ ही गन्ध, पुष्प और अक्षत आदि से कुष्माण्ड का पूजन भी करना चाहिये। इससे उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। कूष्माण्ड नवमी के अलावा उड़ीसा में इस दिन जगतधात्री माता की पूजा भी की जाती है। जगतधात्री, मां दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं। अक्षय नवमी के दिन से मथुरा प्रदक्षिणा, यानि मथुरा की परिक्रमा भी शुरू हो जाती है।

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