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Amla Navmi 2025 Upay: 31 अक्टूबर को आ रहा है अक्षय पुण्य कमाने का मौका, इस दिन कर लें ये 7 उपाय बदल जाएगी जिंदगी

Amla Navmi 2025 Upay: अक्षय नवमी या आंवला नवमी का पर्व कार्तिक मास की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन आंवला के पेड़ के साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन किए गए कुछ उपाय व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखते हैं। आइए जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 28, 2025 पर 11:32 AM
Amla Navmi 2025 Upay: 31 अक्टूबर को आ रहा है अक्षय पुण्य कमाने का मौका, इस दिन कर लें ये 7 उपाय बदल जाएगी जिंदगी
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी या आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है।

Amla Navmi 2025 Upay: कार्तिक मास में कई प्रमुख व्रत और त्योहार आते हैं। करवाचौथ, दिवाली और छठ पूजा के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी या आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। अक्षय का अर्थ है कभी खत्म न होने वाला, यानी इस दिन पूजा, दान और व्रत करने पर अक्षय फल मिलता है। इस दिन आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है और माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। इस साल ये आंवला नवमी की पूजा और अक्षय फल पाने का मौका 31 अक्टूबर के दिन मिलेगा। आइए जानें इस पूजा का महत्व और इस दिन क्या उपाय करने से जिंदगी बदल सकती है?

आंवला नवमी का महत्व

आंवले के पेड़ की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन आंवले के नीचे बैठकर भोजन करने और दान देने से अक्षय पुण्य मिलता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। आंवला खाने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जो आने वाले सर्दियों के मौसम के लिए शरीर को तैयार करती है।

कथा से समझें धार्मिक महत्व

आंवले के पेड़ की पूजा और इसके नीचे भोजन करने की परंपरा खुद माता लक्ष्मी ने शुरू की थी। आंवला नवमी की पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण थीं, तभी उनके मन में भगवान विष्णु और भगवान शिव की एक साथ पूजा करने की इच्छा हुई। उन्होंने सोचा कि ऐसा कैसे संभव होगा? मगर, तभी उन्हें याद आया कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों का गुण एक साथ मौजूद है। माता लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष को भगवान विष्णु और शिव का संयुक्त प्रतीक मानकर उसकी पूरे मन से पूजा की। उनकी पूजा से खुश होकर भगवान विष्णु और भगवान शिव उसी समय प्रकट हुए। माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बना कर पहले दोनों देवताओं को भोग लगाया और फिर स्वयं भोजन किया। बस तभी से यह पवित्र परंपरा चली आ रही है।

जीवन बदलने वाले उपाय

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