अयोध्या एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और दिव्यता की रोशनी से जगमगा उठी है। श्रीराम जन्मभूमि में जहां पहले से बाल स्वरूप में रामलला विराजमान हैं, वहीं अब मंदिर के प्रथम तल पर राजा राम, माता सीता और उनके दरबार का भव्य रूप विराजमान होने जा रहा है। 5 जून, गंगा दशहरा के पावन अवसर पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा पूरे विधि-विधान से की जा रही है। इस खास दिन का इंतज़ार न सिर्फ अयोध्या, बल्कि पूरे देश को था। जैसे ही वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा होगी, मंदिर परिसर एक बार फिर आस्था की ऊर्जा से भर जाएगा।
राम दरबार का ये अलौकिक दृश्य भक्तों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पल होगा। राजा राम के राजसी स्वरूप और पूजन विधियों की भव्यता देखकर हर भक्त गर्व और आनंद से भर उठेगा। ये पल सदियों तक श्रद्धा का प्रतीक बना रहेगा।
राजा राम का शाही श्रृंगार
प्रथम तल पर विराजमान होंगे भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भक्त हनुमान। उनके श्रृंगार की भव्यता भी कम नहीं। गुजरात के कारीगरों द्वारा केवल 10 दिनों में तैयार किए गए हीरे-मोती जड़ित स्वर्णाभूषण अर्पित किए गए हैं। इसमें भगवान राम के मुकुट, कंठहार, बाजूबंद, अंगूठी, कटार से लेकर माता सीता के समस्त आभूषण तक शामिल हैं। साथ ही, हनुमान जी के लिए विशेष गदा और श्रीराम के लिए स्वर्ण तीर-धनुष भी तैयार किए गए हैं।
प्राण प्रतिष्ठा के लिए क्यों चुना गया अभिजीत मुहूर्त?
राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 5 जून को अभिजीत मुहूर्त (11:25 से 11:40 बजे तक) को चुना गया है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम का जन्म भी इसी मुहूर्त में हुआ था। इसलिए ये 17 मिनट का शुभ समय विशेष रूप से पूजन के लिए अत्यंत पवित्र माना गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर गुंजायमान रहेगा।
अष्ट देवालयों में भी मूर्तियों की प्रतिष्ठा
राम दरबार के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थापित 8 अन्य मंदिरों में भी प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। इनमें भगवान शिव, गणपति, अन्नपूर्णा माता, दुर्गा, सूर्यदेव, शेषावतार, हनुमान और शिवलिंग शामिल हैं। तीन दिवसीय अनुष्ठान के अंतर्गत पहले दिन यज्ञशाला में शास्त्रीय पूजन, दूसरे दिन नगर भ्रमण और तीसरे दिन महा पूजन सम्पन्न हो रहा है।
प्राण प्रतिष्ठा से पहले बुधवार को राम मंदिर परिसर में 8 देवी-देवताओं की उत्सव मूर्तियों की पालकी यात्रा निकाली गई। इन मूर्तियों को मखमल की चादर पर सजा कर मंदिर परिसर में भ्रमण कराया गया और रामलला के दर्शन कराए गए। ये यात्रा नगर में होने वाले देवी-देवताओं के आगमन की प्रतीक रही।
देवताओं के विश्राम की विशेष व्यवस्था
प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में सभी मूर्तियों के लिए विशेष शैय्या सजाई गई। शीशम की लकड़ी की बनी ये चौकियां फूलों और मखमल से सजी थीं, जिन पर देव विग्रहों को विश्राम कराया गया। गुरुवार सुबह 6 बजे सभी देवी-देवताओं को मंत्रोच्चार के साथ जगाया गया ताकि दिन की पूजा विधि प्रारंभ की जा सके।
पूरे देश की निगाहें अयोध्या पर
गंगा दशहरा पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का ये कार्यक्रम केवल अयोध्या नहीं, पूरे भारत के लिए आध्यात्मिक गौरव का विषय बन गया है। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और सोशल मीडिया पर भी किया जा रहा है, ताकि दुनिया भर में बसे सनातन धर्म के अनुयायी इस पवित्र क्षण के साक्षी बन सकें।