Bhai Dooj 2025: देश के इस राज्य में भाई दूज पर भाई को श्राप देती हैं बहनें, जानें इसकी पौरणिक मान्यता और कथा

Bhai Dooj 2025: भाई दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम को समर्पित इस पर्व में बहनें अपने भाइयों को टीका करती हैं और उनकी सुख-शांति की कामना करती हैं। आइए जानें देश के किस राज्य में बहनें इस पर्व में अपने भाइयों को देती हैं श्राप

अपडेटेड Oct 22, 2025 पर 7:13 PM
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मिथिला में इसे यम द्वितीया के नाम से ही मनाया जाता है।

Bhai Dooj 2025: पांच दिनों के दीपावली पर्व के अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाते हैं। इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

त्योहार एक नाम अनेक

कर्नाटक में इसे सौदरा बिदिगे के नाम से जानते हैं तो वहीं बंगाल में भाई दूज को भाई फोटा के नाम से जाना जाता है। गुजरात में भौ या भै-बीज, महाराष्ट्र में भाऊ बीज कहते हैं तो अधिकतर प्रांतों में भाई दूज। भारत के बाहर नेपाल में इसे भाई टीका कहते हैं। मिथिला में इसे यम द्वितीया के नाम से ही मनाया जाता है। वहीं, संस्कृत में भाई दूज का नाम भागिनी हस्ता भोजना है।

झारखंड में पूजा की अनोखी परंपरा

झारखंड में इस पर्व में एक विचित्र परंपरा निभाई जाती है। इसके तहत भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों को पहले मरने का श्राप देती हैं। बाद में प्रायश्चित करने के लिए बबूल का कांटा जीभ पर चुभाती हैं। यह भाई दूज की पूजा का हिस्सा होता है, जिसमें घर के बाहर गाय के गोबर से जमीन पर यमलोक का चित्र बनाया जाता है। इसमें यम और यमी के साथ सांप-बिच्छू, द्वारपाल, दीवार आदि बनाती हैं। आइए जानें इस पर्व को मनाने की पौराणिक कथा।

भाई दूज की पौराणिक कथा


पौराणिक कथा के अनुसार एक बार यम और यमनी ऐसे व्यक्ति को यमलोक पहुंचाने के लिए खोज रहे थे, जिसे उसकी बहन द्वारा गाली या श्राप नहीं दिया गया हो। तभी दोनों को एक ऐसा व्यक्ति मिला, जिसको ना तो उसकी बहन ने कभी गाली दी ना ही कभी श्राप दिया था। वह बहन अपने भाई से बेहद प्रेम करती थी, लेकिन यम और यमी उसके भाई की आत्मा को ले जाने उसके घर पहुंच जाते हैं। उसकी बहन को जब ये बात पता चलती है तो वह अपने भाई को बचाने की पूरी कोशिश करती है। उसने बिना वजह अपने भाई को खूब गालियां देनी शुरू कर दी और उसे मरने का श्राप दिया। ये देख यम और यमी को अपना उद्देश्य विफल होता लगा तो यम उसके भाई के प्राण लेने की कोशिश करने लगे। उन्होंने पहले उसके भाई पर दीवार गिराया, उसके ऊपर सांप और बिच्छू छोड़े, लेकिन हर बार बहन ने अपने भाई के प्राण बचा लिए। तभी से इस त्योहार पर भाई को श्राप देने की परंपरा चली आ रही है। बहनें पहले भाइयों को श्राप देती हैं और बाद में अपनी जीभ पर बबूल का कांटा चुभाकर उसका प्रायश्चित करती हैं। इसके बाद सब मिल कर गोधन कुटाई करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से यम-यमी और यम लोक के प्राणी भाग जाते है।

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