Chaiti Chhath Date 2026: आज से शुरू हुआ छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत, जानिए कब होगा संध्या और उषा अर्घ्य

Chaiti Chhath Date 2026: सूर्य की उपासना का महापर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि को समाप्त होता है। ये पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। आज से चैती छठ का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है। आइए जानें कल किस समय दिया जाएगा संध्या अर्घ्य

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 10:30 PM
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आज खरना के साथ छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है।

Chaiti Chhath Date 2026: सूर्य और छठी माता की पूजा का महापर्व छठ हिंदू वर्ष में दो बार मनाया जाता है। एक बार चैत्र में और फिर कार्तिक मास में। दोनों ही महीनों में ये पर्व शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू हो कर सप्तमी तिथि को संपन्न होता है। यह पर्व प्रकृति के पालक और रक्षक सूर्य देवता के प्रति आभार व्यक्ति करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसमें छठी माता की भी पूजा की जाता है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और सुखमय जीवन का प्रतीक हैं।

यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल चैत्र मास में मनाया जाने वाला छठ पर्व 22 मार्च 2026, रविवार से शुरू हो चुका है। आज खरना के साथ छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है। कल सूर्य देवता को पहला संध्या अर्घ्य अर्पित किया जाएगा और बुधवार को उर्षा अर्घ्या देने के बाद यह महापर्व संपन्न हो जाएगा।

चैती छठ 2026 की तारीखें

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैती छठ 2026 की चार मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:

नहाय-खाय : 22 मार्च 2026 (रविवार)

खरना : 23 मार्च 2026 (सोमवार)


संध्या अर्घ्य : 24 मार्च 2026 (मंगलवार)

उषा अर्घ्य और पारण : 25 मार्च 2026 (बुधवार)

खरना : दूसरा दिन खरना है, जो 23 मार्च 2026 को पड़ रहा है। इस दिन शाम को सूर्य देव की पूजा की जाती है। व्रती गुड़ की खीर, फल और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। खरना के बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। इस दिन का भोजन अंतिम भोजन होता है, जिसके बाद व्रती पानी तक नहीं पीते हैं।

संध्या अर्घ्य : छठ पूजा का मुख्य दिन संध्या अर्घ्य है, जो 24 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन शाम को व्रती महिलाएं परिवार के साथ पवित्र नदी या तालाब के किनारे जाती हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। भोग में ठेकुआ, पूरी, फल, सुपारी आदि चढ़ाए जाते हैं।

उषा अर्घ्य और पारण : छठ पूजा का समापन उषा अर्घ्य के साथ 25 मार्च 2026 को होगा। व्रती महिलाएं सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इस दिन व्रत का पारण किया जाता है। सूर्य देव और छठी मैया का पूजन करने के बाद व्रती सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। चैती छठ सूर्य देव और छठी मैया की भक्ति का पर्व है। यह स्वास्थ्य, संतान सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है।

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