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Chaitra Amavasya 2026: इस नाम से भी जानी जाती है चैत्र अमावस्या, जानें इसका महत्व और कब होगा चैत्र अमावस्या का स्नान-दान?

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र मास की अमावस्या तिथि को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। इसका ये नाम क्यों और कैसे पड़ा? साथ ही, जानें इस साल चैत्र अमावस्या की पावन तिथि किस दिन मनाई जाएगी और हिंदू कैलेंडर की इस पहली अमावस्या में पूजा के क्या शुभ मुहूर्त हैं ?

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 07, 2026 पर 6:00 PM
Chaitra Amavasya 2026: इस नाम से भी जानी जाती है चैत्र अमावस्या, जानें इसका महत्व और कब होगा चैत्र अमावस्या का स्नान-दान?
चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या हिंदू धर्म की सबसे पवित्र और शक्तिशाली तिथियों में से एक मानी जाती है। यूं तो, हिंदू कैलेंडर में हर माह आने वाली सभी अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। मूल रूप से ये तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पितरों के लिए दान और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितरों के ईष्ट भगवान विष्णु हैं, इसलिए ही अमावस्या तिथि पर उनकी पूजा की जाती है। चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। आइए जानें इस साल चैत्र अमावस्या कब होगी और इसे भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं? साथ ही, इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय के बारे में भी जानें।

चैत्र अमावस्या 2026 तारीख

चैत्र मास की अमावस्या तिथि को भूतड़ी अमावस्या कहते हैं। यह अमावस्या इस साल 18 मार्च 2026 को प्रात:काल 08:25 बजे शुरू होकर अगले दिन 19 मार्च 2026 को प्रात:काल 06:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार चैत्र अमावस्या या फिर कहें भूतड़ी अमावस्या इस साल 19 मार्च 2026, गुरुवार के दिन पड़ेगी।

क्या है भूतड़ी अमावस्या?

मार्च से अप्रैल मास के बीच में आने वाली चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या कहते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, चैत्र मास की अमावस्या वाले दिन पृथ्वी पर नकारात्मक शक्तियां या फिर कहें बुरी और अतृप्त आत्माएं सक्रिय हो जाती हैं। इनसे बचने के लिए इस तिथि पर तमाम तरह की पूजा करने के साथ ही कुछेक नियमों का विशेष रूप से पालन किया जाता है।

भूतड़ी अमावस्या के ज्योतिष उपाय

जल तीर्थ में स्नान : हिंदू मान्यता के अनुसार चैत्र अमावस्या पर किसी पवित्र नदी, सरोवर या समुद्र में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि जल तीर्थ पर स्नान करने से जीवन के सभी दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

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