Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में जलाते हैं अखंड ज्योति, जो जान लीजिए ये जरूरी बात

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में बहुत से लोग अपने घर के मंदिर में अखंड ज्योति जलाते हैं। माना जाता है अखंड ज्योति जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां दुर्गा की कृपा परिवार पर बनी रहती है। आइए जानें घर में अखंड ज्योति जलाने का क्या है नियम

अपडेटेड Mar 20, 2026 पर 9:17 PM
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नवरात्रि के नौ दिन घर में अखंड ज्योत जलाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।

Chaitra Navratri 2026: देश के बड़े हिस्से में इस समय चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और समापन नवमी तिथि को होता है। इस पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नौ दिनों की इस अवधि में भक्त पहले दिन कलश स्थापना करते हैं, नौ दिनों का उपवास करते हैं और अखंड ज्योति भी जलाते हैं। माना जाता है कि नवरात्रि के नौ दिन घर में अखंड ज्योत जलाने से मां दुर्गा साक्षात वास करती हैं, जिससे परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और खुशहाली आती है।

शक्ति आराधना के इन नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाने का अर्थ है, ऐसा दीपक जो नौ दिनों तक बिना बुझे जलता रहना चाहिए। लेकिन, कई बार सावधानी बरतने के बावजूद हवा के झोंके, घी की कमी या बाती की वजह से अखंड ज्योति बुझ जाती है। ऐसे में मन में डर बैठ जाता है कि कहीं कुछ अनिष्ट तो नहीं होने वाला? क्या माता रानी नाराज हो जाएंगी? तो आइए जानते हैं घर में अखंड ज्योति जलाने के क्या नियम हैं और अगर से बुझ जाए तो क्या करना चाहिए?

भक्ति में भाव है जरूरी

अखंड ज्योति के बुझने को अक्सर लोग बहुत बड़ा अपशकुन मानते हैं। लेकिन, यह सामान्य कारणों से होने वाली घटना भी हो सकती है। शास्त्रों में 'भाव' को सबसे ऊपर रखा गया है। अगर आपकी नीयत साफ है, तो एक छोटी सी तकनीकी चूक आपकी साधना को भंग नहीं करती।

ज्योति बुझ जाए तो तुरंत करें ये काम


  • अगर आपको दिखे कि ज्योति बुझ गई है, तो सबसे पहले मन को शांत करें और माता का ध्यान करें।
  • एक दूसरा छोटा दीपक (साक्षी दीपक) जलाएं और उसे माता के सामने रखें।
  • अखंड दीपक के पात्र को साफ करें, उसमें से जली हुई बाती (गुल) निकालें और नई लंबी बाती लगाएं।
  • अब उसी साक्षी दीपक की लौ से अखंड ज्योति को फिर से जलाएं।
  • हाथ जोड़कर माता रानी से अनजाने में हुई इस गलती के लिए माफी मांगें। आप 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

सच्चे दिल से मातारानी से करें क्षमायाचना

माता रानी से सच्चे दिल से क्षमा मांग लेने पर वह हर भूल को माफ कर देती हैं। 'दुर्गा सप्तशती' के अंत में 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' दिया गया है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि मनुष्य मंत्र, क्रिया और भक्ति से हीन हो सकता है और पूजा के दौरान अनगिनत गलतियां हो सकती हैं। इसके अलावा, 'मार्कण्डेय पुराण' में भी भक्ति और श्रद्धा को कर्मकांड की बारीकियों से ऊपर बताया गया है।

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