Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: प्रतिपदा पर आप भी करते हैं घटस्थापना, तो पहले जान लें इसकी सही तारीख, मुहूर्त और संपूर्ण विधि

Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: नवरात्रि नौ दिनों का महापर्व है, जिसकी शुरुआत पहले दिन यानी प्रतिपदा को कलश स्थापना से होती है। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। आइए जानें इस साल चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना कब होगी, इसका क्या मुहूर्त होगा और संपूर्ण विधि क्या है

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 9:18 PM
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नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को घट स्थापना की जाती है।

Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: हिंदू धर्म में कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सभी तीर्थ और देवता वास करते हैं। अधिकांश पूजा और मांगलिक कार्यों में कलश स्थापना का बहुत महत्व है। नवरात्रि भी ऐसा ही एक महापर्व है, जिसके पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को घट स्थापना की जाती है। माना जाता है कि कलश की स्थापना करने के साथ ही भक्त समस्त देवी-देवताओं और सृष्टि का आह्वान कर रहे हैं। कलश स्थापना चैत्र और शारदीय नवरात्रि दोनों में की जाती है। विधि-विधान से कलश स्थापना करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और घर-परिवार में खुशहाली आती है। अभी चैत्र का महीना शुरू हो चुका है और चैत्र नवरात्रि आने वाली है। आइए जानें इस साल चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना कब की जाएगी, इसका मुहूर्त और विधि क्या होगी?

कब होगी चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर होगा। चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से ही होगा। इस दिन घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगा और मुहूर्त का समापन 7 बजकर 53 मिनट पर होगा।

घटस्थापना की पूरी विधि

एक चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र (घट) लें। वत में सबसे पहले थोड़ी शुद्ध मिट्टी डालें, फिर मुट्ठी भर जौ (ज्वारे) छिड़कें। इसके ऊपर फिर से मिट्टी की एक परत बिछाएं। एक बार फिर जौ और फिर मिट्टी डालें। अब पात्र को ऊपर तक भरकर उस पर हल्का सा पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे।

अब कलश तैयार करें। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सभी तीर्थों और देवताओं का वास होता है। तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरें। इसके कंठ (गले) पर पवित्र मौली (कलावा) बांधें और रोली या चंदन से स्वास्तिक बनाएं।


कलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। एक जटाधारी नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर, कलावा बांधकर पत्तों के बीचों-बीच इस प्रकार रखें कि नारियल का मुख ऊपर की ओर हो। अब इस कलश को मिट्टी वाले पात्र के ऊपर बीच में रख दें।

कलश स्थापना पूरी करने के बाद देवताओं का स्वागत करें। सबसे पहले भगवान गणेश की वंदना करें। हाथ जोड़कर सभी देवी-देवताओं और माता दुर्गा का आह्वान करें और कहें, "हे समस्त दिव्य शक्तियों, आप अगले 9 दिनों के लिए इस कलश में विराजमान होकर हमें अनुग्रहित करें।"

कलश का पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करते हैं। कलश को तिलक लगाएं, अक्षत (चावल) चढ़ाएं और ताजे फूलों की माला अर्पित करें। कलश के समीप फल, मिठाई और प्रसाद रखें। माता को इत्र और नैवेद्य अर्पित कर धूप-दीप जलाएं।

ध्यान रहे कि इन नौ दिनों में जौ वाले पात्र में नमी बनी रहे। जैसे-जैसे ये जौ अंकुरित होकर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे घर में सुख-समृद्धि का आगमन माना जाता है।

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