Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास में होगा मां अंबे का आगमन, जानें चैत्र नवरात्रि में शुभ कार्यों पर क्या होगा असर?

Chaitra Navratri 2026: हर साल चैत्र नवरात्रि में मां अंबे का आगमन अपने साथ शुभता और सकारात्मकता लाता है। लेकिन इस साल नवरात्रि पर्व की शुरुआत पंचक और खरमास के बीच होना अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। लोगों को शंका हो रही है कि इस साल नवरात्रि में शुभ कार्य कर सकेंगे या नहीं

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 6:24 PM
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लोग नवरात्रि के नौ दिनों में गृह प्रवेश, मुंडन और सगाई करना बहुत शुभ मानते हैं।

Chaitra Navratri 2026: मां अंबे अपने साथ शुभता और सकारात्मकता लेकर आती हैं। उनके आने से भक्तों के दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है। मां दुर्गा के भक्त हिंदू वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाते हैं, जिसमें से पहला नवरात्रि पर्व कुछ दिनों में शुरू होने वाला है। ये चैत्र नवरात्रि है, जिसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस साल ये पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। लोग नवरात्रि के नौ दिनों में गृह प्रवेश, मुंडन और सगाई करना बहुत शुभ मानते हैं। लेकिन इस साल लोगों में इस मुद्दे पर दुविधा देखने को मिल रही है। दरअसल, इस साल चैत्र नवरात्रि पंचक और खरमास में शुरू हो रही है। ज्योतिष शास्त्र में खरमास और पंचक दोनों को ही अशुभ काल माना जाता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। आइए खरमास और पंचक का शुभ कार्यों के आयोजन पर क्या प्रभाव रहेगा?

मार्च 2026 में पंचक कब से लग रहा है?

इस साल चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 19 मार्च 2026 से हो रहा है। लेकिन इससे पहले ही पंचक लग जाएगा। मार्च के महीने में पंचक 16 मार्च, सोमवार को शाम 6 बजकर 14 मिनट से आरंभ होगा। पंचक का समापन 20 मार्च को देर रात 2 बजकर 28 मिनट पर होगा। बता दें, पंचक की शुभता और अशुभता सप्ताह के दिन के हिसाब से पंचक तय की जाती है। मार्च में लगने वाला पंचक सोमवार को शुरू होगा, इसलिए ये राज पंचक होगा। इस पंचक को शुभ माना गया है लेकिन फिर भी मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है।

खरमास भी नवरात्रि से पहले शुरू होगा

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत खरमास में होगी। सूर्य का गोचर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में होने के कारण खरमास लगता है। खरमास में शुभ नहीं किए जाते हैं, लेकिन नवरात्र में शुभ कार्य किए जाते हैं। ऐसे में खरमास के समय में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। इसी वजह से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का अभाव दिख रहा है।

कलश स्थापना के लिए क्या है शुभ मुहूर्त


ज्योतिषीय विशेषज्ञों के अनुसार 19 मार्च को अमावस्या तिथि सुबह 6:40 बजे तक रहेगी, ऐसे में नवरात्र के लिए भी प्रतिपदा 19 को ही मानी जाएगी, क्योंकि सुबह 6.40 मिनट से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होगी। इसी के साथ नवरात्रि में लोग घरों में कलश स्थापना करेंगे। स्थाना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:41 बजे से सूर्यास्त से पहले तक रहेगा। इस बार मां दुर्गा का आगमन डोली से व विदाई हाथी पर होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी पर देवी की विदाई शुभ और समृद्धि देने वाला माना जाता है। इसलिए नवरात्र शुभ कहे जा रहे हैं।

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