Chandra Grahan 2026 Date: हाल ही में साल का पहला सूर्य ग्रहण हुआ है। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण था, जिसमें सूरज के चारों ओर एक आग का छल्ला बनते हुए लोगों ने देखा था। इस दुर्लभ खगोलीय घटना के बाद अब समय आ रहा है एक और दुर्लभ नजारे को देखने का। ये साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण होगा, जो सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद होगा।
पंचांग के अनुसार, ये चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इस वजह से इसका सूतक काल मान्य होगा। चंद्र ग्रहण होने की वजह से फाल्गुन पूर्णिमा का स्नान और दान सूतक दोनों प्रभावित होंगे। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो चंद्र ग्रहण राहु और केतु की वजह से लगता है। यह चंद्र ग्रहण सूर्य की राशि सिंह में लगने वाला है, उस समय पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। चंद्र ग्रहण के समय धृति योग बना होगा।
साल का पहला चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का नजर आएगा। इसे ही ब्लड मून कहा जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य और चंद्रमा के बीच में जब पृथ्वी आ जाती है तब चंद्र ग्रहण लगता है। आइए पंचांग से जानें साल का पहला चंद्र ग्रहण किस तारीख को लगेगा, समय, सूतक काल, कहां-कहां दिखाई देगा?
साल का पहला चंद्र ग्रहण तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च दिन मंगलवार को लगेगा। उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रात:काल से लेकर शाम को 5 बजकर 7 मिनट तक है।
चंद्र ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 03:21 बजे पर होगा और इसका समापन शाम 06:46 बजे होगा।
यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर आएगा, इसलिए इसका सूतक माना जाएगा। पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस आधार पर 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 09:39 बजे से शुरू होगा। सूतक काल का समापन चंद्र ग्रहण के खत्म होने के समय यानि शाम 06:46 बजे होगा। सूतक काल में स्नान, दान, पूजा, पाठ, खाना बनाना, भोजन करना, सोना और मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। मंदिरों के कपाट तक बंद कर देते हैं।
कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?
साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में दिखाई देगा। देश के बड़े शहरों में यह आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।
इसके अलावा, इसे पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी और मध्य अमेरिका तथा सुदूर पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में देखा जा सकेगा।
मध्य एशिया और दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्सों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा, वहीं अफ्रीका और यूरोप में यह नजर नहीं आएगा।