Chitragupta Puja 2025 Katha: आज होगी चित्रगुप्त पूजा, जानिए कलम-दवात के देवता की उत्पत्ति की कथा

Chitragupta Puja 2025 Katha: चित्रगुप्त पूजा आज यानी गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 के दिन की जाएगी। इस दिन चित्रगुप्त जी की पूजा करने से जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानें पूजा का मुहूर्त, विधि और चित्रगुप्त की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

अपडेटेड Oct 23, 2025 पर 9:18 AM
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चित्रगुप्त जी की पूजा करने से जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

Chitragupta Puja 2025 Katha: कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक नहीं दो पर्व मनाए जाते हैं। ये पांच दिनों के दिवाली पर्व का अंतिम दिन होता है और इस दिन भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा का त्योहार मनाया जाता है। चित्रगुप्त पूजा या कागज, कलम और दवात की पूजा कायस्थ समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चित्रगुप्त भगवान इनके इष्टदेव हैं और संसार में सभी जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा लिखने वाले हैं। इस साल ये पूजा आज यानी गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 के दिन की जाएगी। इस दिन चित्रगुप्त जी की पूजा करने से जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानें पूजा का मुहूर्त, विधि और चित्रगुप्त की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

पूजा का मुहूर्त

इस साल भगवान चित्रगुप्त की पूजा 23 अक्टूबर के दिन की जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक है। इस दिन आयुष्मान व शिववास योग भी बन रहे हैं।

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:45 बजे से सुबह 05:36 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 02:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 05:43 बजे से शाम 06:09 बजे तक


निशिता मुहूर्त : रात 11:40 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक

पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूर्व दिशा में चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं।
  • उस पर भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • घी का दीपक जलाएं, चंदन, फूल और धूप अर्पित करें।
  • फिर एक नई कलम और सादा कागज पूजा स्थल पर रखें।
  • आरती के समय कलम की आरती करें और सादा कागज पर श्री गणेशाय नमः 11 बार लिखें।

भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति कथा

पुराणों में वर्णित है कि सृष्टि के निर्माण के उद्देश्य से जब भगवान विष्णु ने अपनी योग माया से सृष्टि की कल्पना की तो उनकी नाभि से एक कमल निकला जिस पर ब्रह्मा जी आसीन थे। इन्होंने सृष्ट की रचना की और देव-असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री-पुरूष पशु-पक्षी को जन्म दिया। इसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ जो धर्मराज कहलाए, क्योंकि धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था। धर्मराज ने जब एक योग्य सहयोगी की मांग ब्रह्मा जी से की तो वह ध्यानलीन हो गये और एक हजार वर्ष की तपस्या करते रहे। उनके तेज से एक पुरुष उत्पन्न हुआ। इस पुरुष का जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ था अत: ये कायस्थ कहलाये और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।

चित्रगुप्त पूजा से पाप मुक्त हुआ राजा सौदास 

भगवान चित्रगुप्त की कई कथाएं प्रचलित हैं। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक नगर में सौदास नाम का राजा राज करता था। वह बड़ा ही क्रूर था और सभी को परेशान करता था। राजा के अत्याचार से सभी नगर के लोग बहुत दुखी थे। एक दिन वो अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था। उसी समय उसका सामना अपने राज्य के एक ब्राह्मण से हुआ। ब्राह्मण उस समय पूजा कर रहा था। ब्राह्मण को पूजा करता देख राजा के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि 'वो किस भगवान की उपासना कर रहा है?' उसने ब्राह्मण से जाकर पूछा कि 'आप किस भगवान की पूजा कर रहे हैं?' उस पर ब्राह्मण ने राजा को जवाब दिया और कहा कि 'आज कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। राजा ने हंसते हुए पूजा की सारी सामग्री चित्रगुप्त भगवान को चढ़ा दी। इसके बाद उसे विवेक प्राप्त हुआ और महल में आकर उसने विधि पूर्वक चित्रगुप्त भगवान का पूजन किया। इस तरह वह राजा अपने सभी पाप कर्मों से मुक्त हो गया उसे वैकुंठ में स्थान प्राप्त हुआ।

Chitragupta Puja Date Shubh Muhurat: 23 अक्टूबर को होगी चित्रगुप्त की पूजा, जानें पूजा शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

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