Chitragupta Puja Date Shubh Muhurat: भगवान चित्रगुप्त कायस्थ समाज के इष्टदेव हैं और संसार के सभी जीवों के कर्मों का हिसाब करते हैं। यूं तो साल में दो बार चित्रगुप्त जी की पूजा कायस्थ समाज द्वारा की जाती है, लेकिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चित्रगुप्त भगवान इसी दिन ब्रह्मा जी के नाभि कमल से प्रकट हुए थे। भगवान चित्रगुप्त की पूजा भाई दूज के दिन होती है और ये पांच दिनों के दीपावली पर्व का अंतिम दिन भी होता है। इस साल ये पर्व 23 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। आइए जाने इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा, पूजा विधि और महत्व
चित्रगुप्त पूजा का आयोजन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को किया जाता है। इस दिन कलम, दवात और कागज और किताबों की पूजा की जाती है। इस साल भगवान चित्रगुप्त की पूजा 23 अक्टूबर के दिन की जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक है। इस दिन आयुष्मान व शिववास योग भी बन रहे हैं।
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:45 बजे से सुबह 05:36 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 02:43 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात 11:40 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक
हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज के आराध्य देव माना जाता है। वे यमराज के सचिव हैं, जो मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं। चित्रगुप्त महाराज कलम-दवात की मदद से समस्त जीवों के कर्मों का लेखा जोखा लिखते हैं। इसके आधार पर जीवों को नवजीवन मिलता है। चित्रगुप्त महाराज की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल मिलता है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसलिए इस दिन कायस्थ समाज के लोग विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और अपने लेखन साधनों की पूजा कर उनसे ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।