Dev Deepawali 2025: आज कार्तिक मास का अंतिम दिन है और आज ही के दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार आज के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के असुर का वध किया था। इससे प्रसन्न होकर देवता धरती पर आए थे और गंगा स्नान के बाद गंगा तट पर ढेरों दीपक जलाए थे। इसी के प्रतीक के तौर पर आज देव दीपावली मनाई जाती है। आज के दिन लोग अपने घरों में भी दीये जलाते हैं और मानते हैं कि इससे घर से नकारात्मकता दूर होती है और खुशहाली आती है। आज के दिन जलाए जाने वाले दीयों की संख्या का भी बहुत महत्व माना जाता है। कहते कि आज 51 दीये जलाना पूर्णता का प्रतीक होता है। देव दीपावली के दिन प्रदोष काल में पूजा की जाती है। सूर्यास्त के बाद 2 घंटे का समय प्रदोष काल कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय में लक्ष्मी माता धरती पर अपने भक्तों का हाल जानने के लिए आती हैं। आइए जानें आज के दिन कितने दीपक जलाना चाहिए और 365 बाते के दीपक का उपाय
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त : शाम 5:15 से 7:50 तक
घर में जलाने चाहिए 51 दीये
देव दीपावली पर घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे, पीपल, आंवले और मंदिर में दीप जरूर जलाने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में 51 दीपक जलाने का विधान है। इनमें से 27 नक्षत्रों के लिए 27 दीपक, पंचपाल के नाम से 5 दीपक, 10 दीपपाल के नाम से 10 दीपक, चार दिशाओं के नाम से 4 दीपक और घर के मंदिर, रसोई, आंगन और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाए जाते हैं।
इस तरह जलाएं 365 बाती का दीया
365 बाती का दीपक सूखे नारियल में जलाया जाता है। इसे जलाने के लिए एक कलावा या कच्चा सूत से 365 बाती तैयार करते हैं। अगर आप 5 धागे वाला कलावा या सूत ले रहे हैं तो उसे अपने हाथ पर 73 बार लपेटें और बचे हुए धागे को काट दें। इस तरह से आपकी 365 बाती तैयार हो जाएंगी। अब एक सूखा नारियल लें और उसके दो हिस्से कर लें। नारियल के एक हिस्से में देसी घी भरें और इसमें 365 बाती डालें। इस दीपक को घर के मंदिर में या तुलसी के पौधे के समक्ष जला लें। दीपक के नीचे अक्षत के कुछ दाने जरूर डालें। साथ ही दीये पर हल्दी और रोली का तिलक लगाएं। इसके बाद दीपक में खील डालें। इसके बाद दीपक के ऊपर से तीन बार जल घुमाएं। इस विधि से 365 बाती का दीपक जलाकर आप पूरे साल की पूजा का फल पा सकते हैं।