Vat Savitri Vrat 2026 Date: अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत इसी माह किया जाएगा, जानें पूजा में बरगद पर अर्पित करने वाली सामग्री की लिस्ट

Vat Savitri Vrat 2026 Date: विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का व्रत वट सावित्री व्रत इसी माह यानी ज्येष्ठ में ही किया जाएगा। इस व्रत में बरगद की पूजा की जाती है। इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा में जो सामग्री अर्पित की जाती है, उसकी पूरी लिस्ट यहां दी जा रही है। आइए जानें इसके बारे में

अपडेटेड May 04, 2026 पर 1:25 PM
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वट सावित्री व्रत में माता सावित्री की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

Vat Savitri Vrat 2026 Date: वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह में दो बार किया जाता है। पूर्व और उत्तर भारत में यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को किया जाता है, जबकि दक्षिण और मध्य भारत में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा को किया जाता है। विवाहित महिलाओं के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज को उनके पति सत्यवान के प्राण लौटाने पर मजबूर कर दिया था। माना जाता है कि यमदेव ने बरगद (वट) के पेड़ के नीचे ही सत्यवान को पुनर्जीवन दिया था। इसलिए इस दिन पर विशेष तौर से वट वृक्ष की पूजा को साक्षात ईश्वर की आराधना माना जाता है।

वट सावित्री व्रत कब है ?

पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 16 मई, शनिवार को सुबह 5 बजकर 12 मिनट पर लगेगी और रात में 1 बजकर 31 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि को देखते हुए वट सावित्री व्रत 16 मई को किया जाएगा।

वट सावित्री व्रत पूजा मुहूर्त

इस दिन पूजा के लिए शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का रहेगा। सुहागिन महिलाएं 16 मई को सुबह 11 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकती हैं।


वट सावित्री व्रत में बरगद पर जरूर अर्पित करें ये चीजें

वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा के दौरान सूती वस्त्र, लाल फूल, सिंदूर, कच्चा सूत, अक्षत (अटूट चावल), जनेऊ, चंदन और पान-सुपारी अर्पित करने चाहिए। वट वृक्ष के पास घी का दीपक जलाएं और श्रद्धा अनुसार, पेड़ की 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या मौली (लाल/पीला धागा) लपेटें। ऐसा करने से वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं।

इस भोग के बिना अधूरा है वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत में भीगे हुए चने (चने की दाल) का विशेष महत्व है, इसे सावित्री और सत्यवान को अर्पित करें। इसके बिना भोग पूरा नहीं माना जाता है। पूजा में 5 प्रकार के ऋतु फल (जैसे आम, जामुन, केला, तरबूज, खरबूज, नारियल पानी) भी जरूर शामिल करें। पूजा में गुड़ से बनी मिठाई या गुड़ से बनी मीठी पूरी भी अर्पित कर सकते हैं।

देवी सावित्री को शृंगार की सामग्री अर्पित करें

वट सावित्री व्रत में माता सावित्री की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। उनको सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी जैसी शृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं। मान्यता है कि माता सावित्री को सुहाग का सामान चढ़ाने से व्रती महिला को 'अखंड सौभाग्य' का आशीर्वाद मिलता है।

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