Eid Ul-Fitr 2026: रमजान का पाक महीना जैसे-जैसे समापन के करीब पहुंचता है, ईद-उल-फितर के पर्व की तैयारियां शुरू होने लगती हैं। इस्लाम धर्म को मानने वाले सभी मुसलमानों के लिए ये सबसे बड़ा त्योहार होता है। इस त्योहार को मनाने से पहले तकरीबन सभी वयस्क मुसलमान 28 से 30 दिनों का रोजा रखते हैं। रोजा एक तरह का उपवास है, जिसमें वे सुबह सूर्योदय के बाद से न तो कुछ भी खाते हैं और न कुछ खाते हैं। शाम को इफ्तार के बाद ही रोजा खोला जाता है।
रमजान का ये महीना संयम, नियम और जकात यानी दान और अच्छे कर्मों की सीख देता है। इस सल रमजान का महीना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भारत में आज 18 मार्च को जहां 28वां रोजा रखा गया है, वहीं सऊदी अरब में आज रमजान 1447 हिजरी का 29वां दिन है और 29वां रोजा है। इसलिए आज चांद देखने की कोशिश की जाएगी। यहां अब शव्वाल के चांद के दीदार को लेकर बेचैनी बढ़ने लगी है।
सऊदी अरब में 18 मार्च की रात चांद दिखने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ तो वहां ईद 19 मार्च को होगी, नहीं तो 20 मार्च को। एस्ट्रोनॉमिक सेंटर के अनुसार भारत में 19 मार्च की रात नया चांद दिख सकता है। अगर ऐसा होता है तो ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी। किसी कारणवश अगर चांद नहीं दिखा, तो ईद 21 मार्च को होगी।
हालांकि, अमावस्या पर चांद नजर आने की संभावना न के बराबर होती है। लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में यह संभव भी हो सकता है। वहीं अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की हल्की पतली लकीर दिखाई देती है। इसके बाद ही ईद के त्योहार की आधिकारिक घोषणा की जाती है। ईद के त्योहार की तारीख इस्लामी चंद्र कैलेंडर पर निर्भर करती है। ईद पहली शव्वाल को मनाई जाती है। नया चांद दिखने और इसकी आधिकारिक घोषणा के बाद ही अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों से बुधवार, 18 मार्च की शाम चांद देखने की अपील की है। अगर चांद दिखा तो सऊदी में कल और खाड़ी देशों में उसके अगले दिन ईद मनाई जाएगी। बता दें, सऊदी अरब में नियम है कि वहां जिस भी व्यक्ति को सबसे पहले शव्वाल का चांद नजर आता है, वो नजदीकी कोर्ट में ये जानकारी देने के साथ ही अपनी गवाही भी दर्ज कराता है। चांद दिखने की पुष्टि होने के बाद ईद की तारीख की आधिकारक घोषणा की जाती है।
ईद-उल-फितर को सेवंई ईद या फिर मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार पूरे महीने रोजा रखने के बाद अल्लाह का शुक्रिया अदा करने और भाईचारे का संदेश देता है। ईद के दिन मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है, जकात दी जाती है और लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।