Ekadashi in March 2026: मार्च में आएंगी पापमोचनी एकादशी और कामदा एकादशी, जानें दोनों की तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Ekadashi in March 2026: मार्च का महीना शुरू हो चुका है और इस महीने में भी हर माह की तरह दो एकादशी तिथियां आएंगी। ये तिथियां हिंदू कैलेंडर के आधार पर तय होती हैं। इनमें से एक पापमोचनी एकादशी है और दूसरी कामदा एकादशी है। आइए जानें इन दोनों की तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 7:49 PM
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भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि प्रत्येक हिंदू माह में दो बार कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आती है।

Ekadashi in March 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का व्रत अत्यंत शुभ फलदायी और पवित्र मसपस जाती है। सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित यह तिथि प्रत्येक हिंदू माह में दो बार कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आती है। माना जाता है कि ये भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है और इस दिन व्रत भक्तिभाव से करने वाले अपने भक्त की हर मनोकामना भगवान पूरी करते हैं। इस दिन भक्त सुबह से शाम तक कठिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की बहुत भक्ति और पवित्रता से पूजा करते हैं। यह व्रत द्वादशी तिथि पर पारण के समय तोड़ा जाता है। आइए जानें इस माह में ये व्रत कब किया जाएगा?

एकादशी 2026: तारीख और समय

पापमोचनी एकादशी तारीख और समय

एकादशी तिथि शुरू - मार्च 14, 2026 – सुबह 08:10 बजे

एकादशी तिथि खत्म - मार्च 15, 2026 – सुबह 09:16 बजे

पारण समय - मार्च 16, 2026 – सुबह 06:30 बजे से सुबह 08:54 बजे तक


द्वादशी खत्म होने का समय – सुबह 09:40 बजे

कामदा एकादशी 2026: तारीख और समय

एकादशी तिथि शुरू - मार्च 28, 2026 – सुबह 08:45 बजे

एकादशी तिथि खत्म - मार्च 29, 2026 – सुबह 07:46 बजे

पारण का समय - 30 मार्च, 2026 - सुबह 06:14 बजे से सुबह 07:09 बजे तक

द्वादशी खत्म होने का समय - 30 मार्च, 2026 - सुबह 07:09 बजे

मार्च एकादशी महत्व

एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है। एकादशी के दिन, जो लोग सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे जन्म-मरण के चक्र से बच जाते हैं। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से वे पापों से मुक्त हो जाते हैं और उनके निवास वैकुंठ धाम में प्रवेश प्राप्त करते हैं।

एकादशी व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। हो सके तो पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • पूजा की जगह या पूजा के कमरे को साफ करें।
  • श्री यंत्र के रूप में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
  • देसी घी का दीया जलाएं, मूर्तियों को फूलों से सजाएं और घर की बनी मिठाइयां चढ़ाएं।
  • विष्णु महा मंत्र और ओम नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जाप करें।
  • एकादशी व्रत कथा पढ़ें।
  • शाम को भी भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और आरती पढ़ने के बाद पूजा खत्म करनी चाहिए।
  • अगले दिन, द्वादशी तिथि को एकादशी का व्रत तोड़ा जाता है। हालांकि, जो लोग भूख बर्दाश्त नहीं कर सकते, वे उसी दिन सात्विक खाना या फलाहार कर सकते हैं। एकादशी के दिन चावल खाना मना है।

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