Ganesh Chaturthi 2026: एक बार फिर साल का वह समय पास आ रहा है, जब गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच 10 दिनों के लिए पधारते हैं। भाद्रपद का महीना चल रहा है और कल से इस माह का शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। भक्तों के प्यारे गौरी सुत गणेश भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को धरती पर आते हैं। भक्तों ने उनके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंडालों से लेकर घरों में बप्पा को आसीन करने के लिए लोग मूर्तियां चुन रहे हैं। लेकिन गणेश भगवान की मूर्ति चुनने और उनकी पूजा के कुछ विशेष नियम हैं, जिनकी अनदेखी कष्ट का कारण बन सकती है। गृहस्थ भक्तों को खासतौर से गणेश भगवान की मूर्ति चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानें क्या हैं बप्पा की मूर्ति से जुड़े ये नियम और उनकी पूजा किस दिशा में करनी उत्तम मानी जाती है?
गणपति बप्पा की मूर्ति चुनते समय ये बातें ध्यान रखें
गणेश जी की कैसी मूर्ति चुनें : घर में गणेश चतुर्थी के लिए बैठी हुई गणेशजी की मूर्ति लाना शुभ माना जाता है। विराजमान मुद्रा स्थिरता, सुख और शांति का प्रतीक मानी जाती है। गणेशजी का चेहरा शांत और प्रसन्न मुद्रा वाला हो। मूर्ति खंडित या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में चार भुजाओं वाले गणेशजी के हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा को भी शुभ स्वरूप माना गया है।
गणेशजी की सूंड की दिशा है अहम : दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेशजी की पूजा के नियम बेहद कठोर होते हैं और थोड़ी सी भी चूक होने पर माना जाता है कि फल विपरीत हो सकता है। इन्हें दक्षिणामुखी कहा जाता है और सूर्य तत्व का प्रभाव होता है। इन्हें सिद्धिविनायक स्वरूप से जोड़ा जाता है और इनकी पूजा में विशेष नियमों व अनुशासन का पालन करने की मान्यता है। दक्षिणामुखी गणेशजी को गृहस्थ जीवन में घर पर स्थापित करने से बचा जाता है।
घर के लिए बेस्ट हैं वाममुखी गणपति : गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की स्थापना के लिए मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा जरूर देखनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु के अनुसार घर के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी, यानी वाममुखी गणपति की प्रतिमा को शुभ माना जाता है और इनमें चंद्र तत्व का प्रभाव माना गया है। इनकी पूजा सरल होती है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। ऐसी मूर्ति को गृहस्थ जीवन के लिए सरल और सौम्य स्वरूप माना जाता है।
मूषक और मोदक भी हों साथ : गणेशजी की प्रतिमा खरीदते समय यह भी देखें कि उनके साथ मूषक यानी वाहन बना हुआ हो और हाथ में मोदक या लड्डू हो। धार्मिक मान्यताओं में मूषक भगवान गणेश का वाहन और मोदक उनका प्रिय भोग माना जाता है। प्रतिमा का पूरा स्वरूप सुंदर, संतुलित और साफ-सुथरा होना चाहिए।
वास्तु अनुसार मूर्ति की स्थापना दिशा : वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, गणेशजी की प्रतिमा का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को भी पवित्र माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट और पूजा परंपरा के अनुसार स्थान तय किया जा सकता है।