Ganga Dussehra 2026 Sanyog: ज्येष्ठ अधिक मास में गंगा दशहरा के दिन ही शुरू हुआ नौतपा, जानें इस दुर्लभ संयोग का संकेत

Ganga Dussehra 2026 Sanyog: आज गंगा दशहरा का पवन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। खास बात ये है कि इस साल गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिक मास में पड़ा है और इसी दिन से नौतपा की भी शुरुआत रही है। आइए जानें इस दुर्लभ संयोग का धार्मिक महत्व

अपडेटेड May 25, 2026 पर 2:09 PM
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सूर्य देव वृषभ राशि में गोचर करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा लगता है।

Ganga Dussehra 2026 Sanyog: आज ज्येष्ठ अधिक मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इसलिए आज हिंदू धर्म का प्रमुख और पवित्र पर्व गंगा दशहरा मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन पतित पावनी मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पहली बार धरती पर प्रवाहित हुई थीं। खास बात ये है कि इस साल गंगा दशहरा का पर्व कई दुर्लभ संयोगों में मनाया जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ मास में अधिक मास लगने की वजह से गंगा दशहरा का पावन पर्व ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जा रहा है। इसके आज ही दिन भगवान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे नौतपा की शुरुआत हो रही है। गंगा दशहरा और नौतपा का एक ही दिन शुरू होना ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत संयोग माना जा रहा है।

गंगा दशहरा और नौतपा का ज्योतिषीय संयोग

सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश और नौतपा : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव वृषभ राशि में गोचर करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो वहां से अगले 9 दिनों के काल को 'नौतपा' कहा जाता है। इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून 2026 तक रहेगा। इन दिनों सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हैं, जिससे प्रचंड गर्मी पड़ती है। संयोग से इस वर्ष गंगा दशहरा का पर्व भी इस दिन मनाया जा रहा है। एक तरफ जहां नौतपा सूर्य की तपिश और प्रचंड तेज (अग्नि तत्व) का प्रतीक है, वहीं गंगा दशहरा शीतलता, जल और मोक्ष (जल तत्व) का प्रतीक है। अग्नि और जल के इस संतुलन को सृष्टि के संचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास का अतिरिक्त योग

इस साल ज्येष्ठ के महीने में पुरुषोत्तम मास का संयोग भी जुड़ा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। अधिक मास में मां गंगा की आराधना और दान-पुण्य करने से मिलने वाला फल कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा इस दिन सर्वार्थसिद्धि, रवि योग, आयुष्मान और अमृत योग जैसे शुभ नक्षत्र संयोग भी बने हैं।

आज दान और स्नान का महत्व


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज गंगा दशहरा के दिन गंगा जी में स्नान करने, दान-पुण्य करने और कथा को सुनने या पढ़ने से मनुष्य के 10 प्रकार के पाप (3 कायिक, 4 वाचिक और 3 मानसिक) नष्ट हो जाते हैं। गंगा दशहरा पर संभव हो तो पूजा या दान में 10 की संख्या (जैसे 10 फल, 10 दीपक या 10 ब्राह्मणों को भोजन) का पालन करना विशेष फल देता है। साथ ही, नौतपा की भीषण गर्मी के बीच इस त्योहार के आने से जल और शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं के दान का महत्व सर्वोच्च हो जाता है:

जल का दान : राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना या पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका) दान करना।

रसीले फल : गर्मी से राहत देने वाले फल जैसे आम, तरबूज, खरबूजा आदि का दान।

अन्य वस्तुएं : सत्तू, गुड़, पंखा (हाथ का या बिजली का), छाता और चप्पल दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

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