Gupt Navratri Kalash Sthapana Subh Muhurat: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्रि पर्व आरंभ होने जा रहा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे हिंदू वर्ष में चार नवरात्रि पर्व आते हैं, जिनमें से दो गृहस्थ जन काफी धूमधाम से मनाते हैं। जबकि दो गुप्त नवरात्रि पर्व आषाढ़ और माघ मास में आते हैं। इसमें देवी की नौ महाविद्याओं की साधना की जाती है।
इसमें भी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधि-विधान की जाती है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें अधिक सार्वजनिक आयोजन देखने को नहीं मिलते, लेकिन देवी उपासना करने वाले साधकों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पूरी श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा कई गुना अधिक फल देने वाली मानी जाती है।
शश महालक्ष्मी योग का संयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर शश महालक्ष्मी नाम का एक दुर्लभ शुभ योग बन रहा है। देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 को बताया कि यह अत्यंत शुभ संयोग दस महाविद्याओं की साधना और धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। शश-महालक्ष्मी जैसे दुर्लभ योग साधकों की सोई हुई किस्मत जगाने, भौतिक सुख-सुविधाओं की वृद्धि और सात पीढ़ियों तक की दरिद्रता मिटाने में अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं। गुप्त नवरात्रि का उद्देश्य गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति और तंत्र साधना करना होता है।
आषाढ़ नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त
आषाढ़ नवरात्रि पर इस विधि से करें कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि के दौरान अपने घर में कलश स्थापना करने के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। गंगाजल का छिड़काव जरूर करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता की दस महाविद्याओं का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
मिट्टी या तांबे के कलश में साफ जल भरकर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें और विधि-विधान से मां का आवाहन करें। कलश स्थापना के बाद अखंड दीप जलाना, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और नियमित रूप से माता की आरती करना भी बेहद शुभ माना गया है।