Guru Pradosh Vrat 2026 Date: अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत होगा इस दिन, जानिए तारीख और शुभ मुहूर्त

Guru Pradosh Vrat 2026 Date: प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। अभी ज्येष्ठ अधिक मास का प्रदोष व्रत आने वाला है। आइए जानें अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें पूजा का मुहूर्त क्या होगा

अपडेटेड May 26, 2026 पर 8:40 PM
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अधिक मास के गुरु प्रदोष व्रत से चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शांत होती है।

Guru Pradosh Vrat 2026 Date: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। इस व्रत का नाम जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है उसके आधार पर तय होता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का संयोग बना है। ऐसे में अब जो प्रदोष व्रत किया जाएगा, वह अधिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत होगा।

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार को पड़ रही है। इसलिए इस व्रत का नाम गुरु प्रदोष व्रत होगा। खास बात यह है कि अधिक मास का प्रदोष व्रत साधारण व्रत नहीं होता है, क्योंकि यह मौका तीन साल के बाद आता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के दुख, दरिद्रता और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही गुरु ग्रह से जुड़े दोषों में भी राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अधिक मास गुरु प्रदोष व्रत की तारीख और मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह व्रत 28 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 28 मई 2026 को सुबह 07:56 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त : 29 मई 2026 को सुबह 09:50 बजे


प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 07:12 PM से रात 09:15 PM तक

कुल अवधि : 2 घंटे 02 मिनट

अधिक मास गुरु प्रदोष का धार्मिक महत्व

गुरु और शिव की दोहरी कृपा : गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति (बृहस्पति देव) को समर्पित है और प्रदोष व्रत भगवान शिव को। इस दिन व्रत रखने से शिक्षा, ज्ञान, उच्च पद और वैवाहिक सुख में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

ग्रह दोषों से मुक्ति : ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास के गुरु प्रदोष पर शिव जी की पूजा करने से कुंडली के चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का नकारात्मक प्रभाव शांत होता है, क्योंकि भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना गया है।

पितरों का आशीर्वाद : इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन मधुर होता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले या सफेद रंग के साफ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार रहें या निराहार रहकर मन ही मन शिव मंत्रों (ॐ नमः शिवाय) का जाप करें।
  • शाम को प्रदोष मुहूर्त में दोबारा स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं।
  • शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद चंदन, अक्षत (साबुत चावल), और पीले या नीले फूल अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाकर गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। अंत में शिव जी की आरती करें और भोग लगाकर सभी में प्रसाद बांटें।

गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में तांडव करते हैं और उस समय उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अधिक मास में यह व्रत करने से पिछले कर्मों के दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

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