Guru Pradosh Vrat 2026 Date: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। इस व्रत का नाम जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है उसके आधार पर तय होता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का संयोग बना है। ऐसे में अब जो प्रदोष व्रत किया जाएगा, वह अधिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत होगा।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार को पड़ रही है। इसलिए इस व्रत का नाम गुरु प्रदोष व्रत होगा। खास बात यह है कि अधिक मास का प्रदोष व्रत साधारण व्रत नहीं होता है, क्योंकि यह मौका तीन साल के बाद आता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के दुख, दरिद्रता और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही गुरु ग्रह से जुड़े दोषों में भी राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अधिक मास गुरु प्रदोष व्रत की तारीख और मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह व्रत 28 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 28 मई 2026 को सुबह 07:56 बजे
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 07:12 PM से रात 09:15 PM तक
कुल अवधि : 2 घंटे 02 मिनट
अधिक मास गुरु प्रदोष का धार्मिक महत्व
गुरु और शिव की दोहरी कृपा : गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति (बृहस्पति देव) को समर्पित है और प्रदोष व्रत भगवान शिव को। इस दिन व्रत रखने से शिक्षा, ज्ञान, उच्च पद और वैवाहिक सुख में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
ग्रह दोषों से मुक्ति : ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास के गुरु प्रदोष पर शिव जी की पूजा करने से कुंडली के चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का नकारात्मक प्रभाव शांत होता है, क्योंकि भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना गया है।
पितरों का आशीर्वाद : इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन मधुर होता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में तांडव करते हैं और उस समय उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अधिक मास में यह व्रत करने से पिछले कर्मों के दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।