Hindu Nav Varsh 2026 Vikram Samvat 2083: 2026 में इस दिन से शुरू होगा हिंदू नववर्ष, नव संवत्सर में ज्येष्ठ माह आएगा दो बार

Hindu Nav Varsh 2026 Vikram Samvat 2083: हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है। इस साल हिंदू नववर्ष में ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा। आइए जानें इस साल किस तारीख से शुरू होगा हिंदू नर्ववर्ष और कितने महीनों का होगा नया साल

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 5:28 PM
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Hindu Nav Varsh 2026 Vikram Samvat 2083: हिंदू नववर्ष की शुरुआत एक जनवरी से नहीं होती है। हिंदू कैलेंडर की गणना चंद्रमा पर आधारित महीनों यानी चंद्रमास के हिसाब से की जाती है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। हिंदू कैलेंडर को विक्रम संवत कहते हैं। इस साल हिंदू नववर्ष शुरू होगा, तो वो नव संवत्सर 2083 होगा। नव संवत्सर 2083 धार्मिक नजरिए से काफी खास होगा, क्योंकि इस विक्रम संवत में 12 नहीं 13 महीने होंगे यानी एक महीना बढ़ जाएगा। साल में एक अतिरिक्त महिना जुड़ना खगोलीय और ज्योतिषीय गणना आधारित घटना है। आइए जानें इस साल नव संवत्सर की शुरुआत किस दिन से होगी और इस साल 13 महीनों का क्या है कारण?

विक्रम संवत 2083 कब से होगा शुरू

विक्रम संवत 2083 की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है, जो गुरुवार, 19 मार्च 2026 को होगी। इसी दिन गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र (वसंत) नवरात्रि भी शुरू होंगे। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से होती है। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को संपन्न होगी।

क्यों खास है विक्रम संवत 2083?

विक्रम संवत 2083 का खास होने वाला है, क्योंकि इसमें अधिक मास (अतिरिक्त महीना) शामिल होगा, जिससे हिंदू नववर्ष 13 महीनों का होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में अधिक मास के कारण एक अतिरिक्त महीना होगा, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

13 महीनों का होगा हिंदू वर्ष


मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इस अतिरिक्त महीने को अपना नाम दिया, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व अन्य महीनों से अधिक हो गया। जब सूर्य और चंद्रमा की गति असंतुलित हो जाती है तब पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इस अतिरिक्त महीने को मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। माना जाता है कि यह समय भगवान विष्णु की कृपा से विशेष रूप से शुभ और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उत्तम होता है।

ज्येष्ठ में होगा अधिक मास

विक्रम संवत 2083 ज्येष्ठ माह में अधिक मास होगा। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इसके कारण वर्ष के आने वाले सभी व्रत और त्योहार लगभग 15 से 20 दिन आगे बढ़ जाएंगे। एक सामान्य ज्येष्ठ माह, दूसरा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम मास) अतिरिक्त महीने के कारण, ज्येष्ठ लगभग 58-59 दिनों तक चलेगा। इस दौरान दोनों महीने आंशिक रूप से एक-दूसरे से मिलेंगे।

अधिकमास का पौराणिक महत्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब अतिरिक्त महीना पहली बार अस्तित्व में आया तो कोई भी देवता इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। तब भगवान विष्णु ने इसे अपने संरक्षण में लिया और इसे पुरुषोत्तम मास नाम दिया। तभी से ये अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मास में किया गया कोई भी शुभ कार्य किसी अन्य मास से ज्यादा शुभ फल देता है। पंचांग के अनुसार, अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा।

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