Holi 2026 Date: होली कब है? नए साल में होली का त्योहार इस दिन मनाया जाएगा, जानिए तारीख और होलिका दहन का मुहूर्त

Holi 2026 Date: रंगो का त्योहार होली साल के प्रमुख और बड़े त्योहारों में से एक माना जाता है। होली चैत्र मास की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इससे एक दिन पहले फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है। आइए जानें नए साल में होलिका दहन का मुहूर्त और होली की तारीख

अपडेटेड Dec 15, 2025 पर 9:08 PM
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होलिका दहन के बाद ही होली के पर्व की शुरुआत होती है।

Holi 2026 Date: रंगों का त्योहार होली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। ये त्योहार अपने साथ सिर्फ त्योहारों की खुशियां ही लेकर नहीं आता है, बल्कि इसके साथ मौसम में बदलाव का संकेत भी होता है। ये त्योहार पूरे देश में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। ये पर्व हिंदू पर्व चैत्र की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है और इससे एक दिन पहले यानी फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। इस दिन होलिका माता की पूजा की जाती है और उन्होंने भोग-प्रसाद अर्पित किया जाता है। होलिका दहन के बाद ही होली के पर्व की शुरुआत होती है। होली के शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर गले मिलते हैं और घरों में कई तरह के पकवान बनाते हैं। आइए जानें नए साल में ये त्योहार किस दिन मनाया जाएगा।

नए साल में 4 मार्च को होगी होली

साल 2026 में होली का त्योहार बुधवार, 4 मार्च के दिन मनाया जाएगा। रंग वाली होली को ही धुलण्डी कहा जाता है। होलिका दहन 3 मार्च को मंगलवार के दिन किया जाएगा। होली के दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं होगा और दोपहर 12:33 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक राहुकाल रहेगा।

होलिका दहन की तारीख और मुहूर्त

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात को किया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:55 बजे शुरू होकर अगले दिन 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। वहीं, पंचांग के अनुसार, होलिका दहन मंगलवार, 3 मार्च को शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेग। इस अनुष्ठान के लिए 2 घंटे 28 मिनट की अवधि होगी।

होली पर रहेगी भद्रा


साल 2026 में होली के दिन भद्रा की अशुभ छाया रहेगी। भद्रा मध्यरात्रि 01:25 बजे से तड़के 04:30 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

होली से जुड़ी पौराणिक मान्यता

होली से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, यह त्योहार भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका की कहानी की याद दिलाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से भी जुड़ा हुआ है। यह पर्व बुराई पर अच्छा की जीत और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इसके अलावा, ये पर्व भगवान श्री कृष्ण का भी प्रिय त्याहार है।

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