Holika dahan parikrama 2026: होलिका दहन के ये नियम मानना है जरूरी, जानें 3, 5 या 7 कितनी बार करें होलिका की परिक्रमा और इसका महत्व क्या है?

Holika dahan parikrama 2026: होलिका दहन पूरे होली पर्व की एक बेहद अहम परंपरा है। होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को होली से ठीक पहले किया जाता है। होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा की जाती। होलिका जलने के बाद उसकी परिक्रमा का भी बहुत महत्व है

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 5:48 PM
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होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को होली से ठीक पहले किया जाता है।

Holika dahan parikrama 2026: रंगों के पर्व होली से एक शाम पहले फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को किया जाता है होलिका दहन। बुराई पर अच्छा की विजय के प्रतीक माने जाने वाले इस अनुष्ठान का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार शुभ काल में होलिका दहन किया जाता है। इससे पहले विधि-विधान से होलिका की पूजा की जाती है और अनुष्ठान के लिए जरूरी समग्री उसमें अर्पित की जाती है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि धरती में मौजूद बुरी और नकारात्मक ऊर्जा होलिका दहन की अग्नि में समाप्त हो जाती है। इसलिए इस अनुष्ठान से जुड़े कुछ बेहद जरूरी नियम हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। आइए जानें इस साल होलिका दहन किस समय होगा और इसके जरूरी नियम क्या हैं?

होलिका दहन पर रहेगी भद्रा

वैदिक पंचांग के अनुसार, होलिका दहन 2 मार्च की रात किया जाएगा। इस दिन भद्रा काल शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। ज्योतिष आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार इस बार भद्रा का प्रवास भू-लोक पर माना जा रहा है। इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।

होलिका दहन के जरूरी नियम

होलिका दहन से पहले कलावा लपेटते हुए 5-7 बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में विशेष ऊर्जा होती है, जिससे नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं।

होलिका दहन के अनुष्ठान में सफेद, पीले या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन चमड़े के वस्त्र या काले रंग के कपड़े नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं।


महिलाओं को इस दिन ज्यादा चमकीले और गहरे रंगों के कपड़ों से बचना चाहिए। साथ ही अपने बाल खुले नहीं छोड़ने चाहिए। पूजा के समय बाल खुले रखने से नकारात्मक शक्तियों का वास घर में हो सकता है।

होलिका जलाकर तुरंत वहां से न लौटें, कुछ देर वहां रुकने के बाद वापस आएं। उसकी अग्नि में जौ या अक्षत अर्पित करें। भुने हुए अनाज को लोग घर लाने के बाद प्रसाद के रूप में बांटते हैं।

होलिका दहन के बाद अगले दिन सुबह उसकी राख को घर लाकर माथे पर लगाएं और घर के चारों कोनों में छिड़कें। इससे वास्तु दोष दूर होता है।

होलिका दहन पर होलिका माता की पूजा की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। होलिका दहन के दिन नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए मांस और मदिरा का सेवन न करें। इससे धन हानि और रोग हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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