Magh Mela 2026: कल से शुरू हो जाएगा माघ मेला, जानें स्नान की तिथियां और कल्पवास का महत्व

Magh Mela 2026: कल पौष माह की पूर्णिमा है। इसी दिन से प्रयायराज में संगम तट पर माघ मेला शुरू होता है। ये हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र आयोजनों में से एक माना जाता है। माघ के महीने में बहुत से भक्त संगम तट पर कल्पवास भी करते हैं। आइए जानें इसमें होने वाली प्रमुख स्नान तिथियों के बारे में

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 1:59 PM
Story continues below Advertisement
मौनी अमावस्या को मुख्य स्नान होता है सबसे अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं।

Magh Mela 2026: माघ महीने की शुरुआत के साथ ही तीर्थराज प्रयागराज में एक अलग ही आध्यत्मिक माहौल देखने को मिलता है। पौष महीने की पूर्णिमा से यहां कल्पवास करने वाले जुट जाते हैं और फिर अगले एक महीने तक भगवान के जप-तप और स्नान कर सात्विक जीवन जीते हैं। यह हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख आयोजनों में से एक माना जाता है। माघ मेला पौष पूर्णिमा से शुरू हो कर फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि तक रहता है। इस दौरान प्रयागराज स्थिति त्रिवेणी संगतम यानी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर भक्ति और आस्था का सैलाब उमड़ता है। आइए जानें इस साल माघ मेला कब से शुरू हो रहा है और कब खत्म होगा? साथ ही जानें कल्पवास क्या है और इसका सनातन परंपरा में क्या महत्व है?

माघ मेला 2026 तारीख

  • माघ मेला 2026 की शुरुआत पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 से होगी।
  • मेला महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को समाप्त होगा।

माघ मेला 2026 प्रमुख स्नान तिथियां

माघ मेले में कुल 6 मुख्य स्नान पर्व होते हैं। इसमें माघ अमावस्या यानी मौनी अमावस्या को सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन मुख्य स्नान होता है सबसे अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं। अंतिम स्नान महाशिवरात्रि के दिन होता है।


पौष पूर्णिमा : 3 जनवरी 2026

मकर संक्रांति : 14 जनवरी 2026

मौनी अमावस्या (मुख्य स्नान): 18 जनवरी 2026

बसंत पंचमी : 23 जनवरी 2026

माघ पूर्णिमा : 1 फरवरी 2026

महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान): 15 फरवरी 2026

माघ मेला हर साल प्रयागराज में ही क्यों लगता है?

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत की बूंदें चार स्थानों यानी हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में गिरी थीं। इन जगहों पर कुंभ मेला 12 साल में एक बार लगता है, लेकिन माघ मेला केवल प्रयागराज में हर साल आयोजित होता है। मान्यता है कि माघ महीने में संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है, जो साल के किसी और समय नहीं मिलता।

कल्पवास क्या है?

कल्पवास माघ मेले की एक बहुत कठिन लेकिन पवित्र साधना है। इसमें श्रद्धालु पूरे माघ महीने तक संगम के किनारे रहते हैं। इसके कुछ कठिन नियम हैं, जिनका पालन कल्पवास करने वाले भक्त जरूर करते हैं। जैसे :

  • रोज तीन बार स्नान किया जाता है
  • केवल सात्विक भोजन, वह भी दिन में एक बार
  • ध्यान, भजन, कीर्तन और पूजा
  • जमीन पर सोना, सभी सुख-सुविधाओं का त्याग
  • मान्यता है कि कल्पवास करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

कल्पवास का महत्व

कल्पवास में भक्त टेंट या कुटिया में रहकर कठिन नियमों का पालन करते हैं। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और संयम का होता है। इस दौरान संगम में स्नान और कल्पवास करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी आस्था के कारण देश-विदेश से श्रद्धालु हर साल प्रयागराज आते हैं।

Magh Mela 2026: संगम और माघ मेले का है अटूट संबंध, जानिए हर साल यहीं पर क्यों लगता है माघ मेला?

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।