Magha Purnima Vrat 2026: कब है माघ पूर्णिमा? जानें तिथि, स्नान-दान का मुहूर्त और महत्व

Magha Purnima Vrat 2026: माघ पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में एक माना जाता है। इस दिन स्नान-दान और व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। आइए जानें माघ पूर्णिमा की सही तारीख और मुहूर्त

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 8:09 PM
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इस साल, 2026 में माघ पूर्णिमा का व्रत रविवार, 1 फरवरी को किया जाएगा।

Magha Purnima Vrat 2026: माघ का महीना हिंदू कैलेंडर के सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इसमें गंगा स्नान और दान का बहुत महत्व है। इसी माह में तीर्थराज प्रयाग में त्रिवेणी संगम तट पर भक्त कल्पवास करते हैं और इसी महीने में माघ मेला भी आयोजित होता है। माघ मेले में होने वाले प्रमुख स्नान पर्व में माघ पूर्णिमा के स्नान का भी विशेष महत्व है। इस साल, 2026 में माघ पूर्णिमा का व्रत रविवार, 1 फरवरी को किया जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु और चंद्र देव को समर्पित है। पूर्णिमा की तिथि माता लक्ष्मी को भी सतर्पित होती है। माना जाता है, इस दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण के लिए आती हैं। इस साल माघ पूर्णिमा की तिथि को लेकर भक्तों में भ्रम है, इसलिए आइए जानें ये तिथि कब से लगेगी और स्नान-दान का मुहूर्त क्या होगा?

कब है माघ पूर्णिमा?

हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी, 2026 को सुबह 05:52 बजे शुरू होगी और 2 फरवरी, 2026 को सुबह 03:38 बजे समाप्त होगी। माघ पूर्णिमा की शाम को चंद्रोदय 05:26 बजे होगा। इस समय चंद्र देव को अर्घ्य देना बहुत अच्छा माना जाता है।

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि का समय

कार्यक्रम तारीख और समय

माघ पूर्णिमा व्रत : रविवार, 1 फरवरी, 2026


पूर्णिमा व्रत के दिन शुक्ल पूर्णिमा : चंद्रोदय शाम 05:26 बजे

पूर्णिमा तिथि शुरू : 01 फरवरी, 2026 सुबह 05:52 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 02 फरवरी, 2026 प्रात:काल 03:38 बजे

माघ पूर्णिमा का महत्व

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में सबसे शुभ पूर्णिमा व्रतों में से एक है। माना जाता है कि यह पापों को दूर करता है, मन को शुद्ध करता है, और शांति, समृद्धि और संतान प्रदान करता है। भविष्य पुराण के अनुसार, कुछ खास महीनों में रखे जाने वाले पूर्णिमा व्रत को द्वात्रिंशी या बत्तीसी पूर्णिमा व्रत के नाम से जाना जाता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण और महाभारत जैसे धर्मग्रंथ में इस व्रत का महत्व बताया गया है। इस दिन, चंद्रमा अपने पूरे रूप में होता है, और उनकी पूजा करने से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन बढ़ता है।

पूर्णिमा व्रत सरल पूजा विधि

माघ पूर्णिमा की सुबह, यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अन्यथा, घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करना भी स्वीकार्य है। स्नान के बाद, व्रत रखने का संकल्प लें। कलश स्थापना और भगवान गणेश की पूजा से शुरू करें, इसके बाद भगवान शिव और देवी पार्वती की षोडशोपचार पूजा करें। भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की भी पूजा करें। शाम को चंद्र देव को अर्घ्य दें, पूर्णिमा व्रत कथा सुनें और सत्यनारायण व्रत कथा करें, जिसे बहुत शुभ माना जाता है।

भोजन के नियम

पानी, फल या दूध से बना सादा शाकाहारी भोजन। इस दिन अनाज, मसाले, चाय, कॉफी, तंबाकू और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। कई भक्त निर्जला या सिर्फ पानी का उपवास रखते हैं। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा उपवास को विश्वास और अनुशासन के साथ करने से स्थायी खुशी, समृद्धि और आंतरिक शांति मिलती है।

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