Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर कब करें जलाभिषेक? जानें चार प्रहर का टाइम और पूजा नियम

Mahashivratri 2026: 15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाला यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इसी रात शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। भक्त इस दिन व्रत रखकर, जागरण कर और चारों प्रहर विशेष पूजा कर शिव आराधना करते हैं

अपडेटेड Feb 15, 2026 पर 9:22 AM
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Mahashivratri 2026: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में आस्था और भक्ति के वातावरण के बीच मनाया जा रहा है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात्रि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी शुभ अवसर पर शिव और पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था, इसलिए यह दिन प्रेम, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वर्षभर में कई शिवरात्रियां आती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक बताया गया है।

इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और चारों प्रहर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। रातभर जागरण कर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जाता है, जिससे मन की शुद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है। यह पर्व भक्ति, संयम और आत्मिक जागरण का संदेश देता है।

चार प्रहर पूजन के शुभ मुहूर्त


महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में पूजा का विशेष महत्व है।

प्रथम प्रहर: शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक।

द्वितीय प्रहर: रात 9:23 बजे से 16 फरवरी की अर्धरात्रि 12:35 बजे तक।

तृतीय प्रहर: 12:35 बजे से सुबह 3:47 बजे तक।

चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:47 बजे से 6:59 बजे तक।

इन चारों प्रहरों में शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

निशीथ काल का विशेष महत्व

महाशिवरात्रि पर निशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यह शुभ समय 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। इस काल में किया गया पूजन विशेष फल प्रदान करता है।

जलाभिषेक के शुभ अवसर

आज जलाभिषेक के कई शुभ मुहूर्त हैं—

सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक,

9:48 से 11:11 बजे तक,

11:11 से 12:35 बजे तक (अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त),

और शाम 6:11 से 7:47 बजे तक।

इन समयों में श्रद्धा से जल अर्पित करने पर शिव कृपा प्राप्त होती है।

बन रहे हैं अद्भुत शुभ योग

आज व्यतीपात और सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शिव और चंद्रमंगल जैसे कई मंगलकारी योग भी बन रहे हैं। सूर्य, बुध और शुक्र की युति से बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण और शुक्रादित्य जैसे राजयोग भी बन रहे हैं, जो इस दिन को और खास बना रहे हैं।

पूजन विधि

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल, दूध या गन्ने के रस से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें, शिव चालीसा पढ़ें और आरती करें। रात्रि जागरण करना भी शुभ माना गया है।

महाशिवरात्रि की प्रेरक कथा

गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि एक शिकारी ने अनजाने में बिल्वपत्र और जल शिवलिंग पर अर्पित कर दिया। उसकी अनजानी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष प्रदान किया। यह कथा सिखाती है कि सच्चे मन से की गई छोटी-सी भक्ति भी भोलेनाथ को प्रिय होती है।

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