Mahashivaratri 2026: भगवान भोलेनाथ की पूजा में जरूर चढ़ाएं ये तीन चीजें, इनके बिना पूरी नहीं मानी जाती है पूजा

Mahashivaratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के असंख्य भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। महादेव की की पूजा में तीन चीजें अर्पित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानें इनके बारे में

अपडेटेड Feb 09, 2026 पर 8:48 PM
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यह पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि को हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन पूरे देश के छोटे-बड़े शिवालयों से लेकर ज्योतिर्लिंग तक अलग उत्साह देखने को मिलता है। भक्तों की लंबी कतारें और मंदिरों में भव्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करना बहुत जरूरी माना जाता है। शास्त्रों और पुराणों में बताई गई इन चीजों के बारे में माना जाता है कि इनके बिना महाशिवरात्रि की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है।

भस्म, रुद्राक्ष और बेलपत्र हैं अत्यंत महत्वपूर्ण

देवघर के ज्योतिषी पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के शिवलिंग पर तीन खास चीजें जरूर चढ़ानी चाहिए। ये तीनों हैं भस्म, रुद्राक्ष और बेलपत्र। इनका भगवान शिव से गहरा संबंध है, और इनके बिना महाशिवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानें इन तीनों का महत्व।

जीवन की नश्वरता का प्रतीक है भस्म

ज्योतिषी मुद्गल बताते हैं कि भस्म भगवान शिव का सबसे प्रिय श्रृंगार है। शिव को 'भस्मधारी' भी कहा जाता है और महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर भस्म चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं। भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनके भक्तों के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और यह संदेश देती है कि सभी सांसारिक चीजें आखिरकार खत्म हो जाती हैं।

महादेव के आंसू से उत्पन्न हुआ रुद्राक्ष


माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर रुद्राक्ष चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है और ग्रहों के दोष कम होते हैं। पूजा के बाद रुद्राक्ष पहनना बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है।

त्रिमूर्ति का प्रतीक है बेलपत्र

बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। माना जाता है कि बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिमूर्ति: ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि के दिन सही विधि-विधान से शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पंडित नंद किशोर मुद्गल ने बताया कि महाशिवरात्रि की पूजा में देवाधिदेव महादेव का पवित्र भस्म से तिलक करें, उन्हें रुद्राक्ष पहनाएं और पूजा के दौरान बेल पत्र अर्पित करें। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की ये तीनों प्रिय चीजें आस्था और विश्वास के साथ शिवलिंग पर चढ़ाई जाएं, तो पूजा संपूर्ण मानी जाती है और भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

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