Mahashivratri 2026 Date and Time: जिस मुहूर्त में लिंग रूप में प्रकट हुए थे शिव, जानें इस साल महाशिवरात्रि में कब होगा वो समय

Mahashivratri 2026 Date and Time: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के लिंग स्वरूप यानी शिवलिंग की पूजा की जाती है। ये पर्व हर साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। आइए जानें इस साल कब मिलेगा वो खास मुहूर्त जिसमें भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे

अपडेटेड Feb 14, 2026 पर 8:21 PM
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महाशिवरात्रि पर्व में निशिता काल मुहूर्त को सबसे शक्तिशाली माना गया है।

Mahashivratri 2026 Date and Time: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित हिंदू धर्म का बहुत बड़ा पर्व है। इसमें दुनिया भर के शिव भक्त उपवास करते हैं, पूजन, भजन और अनुष्ठान करते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव जब विराट लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। इस पर्व में रात के चार प्रहर में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। महाशिवरात्रि पर्व में निशिता काल मुहूर्त को सबसे शक्तिशाली माना गया है। कहते हैं, महादेव इसी काल में लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे।

निशिता काल का महामुहूर्त

15 फरवरी की मध्यरात्रि 12:09 बजे से मध्यरात्रि 01:01 बजे के बीच 'निशिता काल' का समय सबसे शक्तिशाली है। ये 52 मिनट का महामुहूर्त है। माना जाता है कि इसी समय शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।

वैराग्य छोड़ देवी सती के हो गए थे महादेव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि महादेव और देवी सती के पवित्र मिलन का महापर्व है। यही वो तिथि थी, जिसमें श्मशान वासी शिव वैराग्य छोड़ दूल्हा बने थे। इसलिए महाशिवरात्रि सिर्फ एक तिथि न होकर वो महान रात्रि है, जिसमें प्रकृति और पुरुष एक हुए थे।

सर्वार्थ सिद्धि योग और बुधादित्य योग का संगम


महाशिवरात्रि पर ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो आपके जीवन के सारे संकट हरने की शक्ति रखता है। 2026 में महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और बुधादित्य योग का अद्भुत संगम हो रहा है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस बार की शिवरात्रि मानसिक शांति और आर्थिक उन्नति के द्वार खोलने वाली होगी।

कुंडली के दोषों का होगा अंत

चंद्र दोष : अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है या आप मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो यह रात आपके लिए वरदान है।

शनि की साढ़ेसाती : महादेव 'कालों के काल' हैं, उनकी आराधना से शनि का प्रकोप शांत होता है।

अभिषेक विधि : शिवलिंग पर दूध, गंगाजल और शहद चढ़ाते हुए "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें। विवाहित महिलाएं मां पार्वती को सिंदूर या मेहंदी अर्पित करें, इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।

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