Rangbhari Ekadashi 2026: फाल्गुन मास की अंतिम एकादशी होगी इस दिन, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व

Rangbhari Ekadashi 2026 Date: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी होती है। आइए जानें इस साल रंगभरी एकादशी का व्रत किस दिन किया जाएगा और इसका मुहूर्त और महत्व क्या हैं

अपडेटेड Feb 14, 2026 पर 5:43 PM
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फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

Rangbhari Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म एकादशी तिथि को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। जग के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत प्रत्येक हिंदू माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में किया जाता है। इस तरह भक्त ये व्रत साल में 24 बार करते हैं। एकादशी व्रत को भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के सबसे सरल मार्ग के रूप में जाना जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ये एकादशी व्रत होली के त्योहार से कुछ ही दिन पहले होता है, इसलिए इस दिन वृंदावन और काशी में भव्य आयोजन किए जाते हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें पूजा का मुहूर्त क्या होगा ?

रंगभरी एकादशी तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी और रात 10 बजकर 32 मिनट पर इस इसका समापन होगा। उदयातिथि के अनुसार, रंगभरी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 06:47 से 09:06 बजे के बीच किया जा सकता है।

पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • एक चौकी पर शिव-पार्वती और श्री हरि की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उन्हें चंदन, बिल्वपत्र , भांग और धतूरा, फूल-माला, मिठाई, शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती को गुलाबी रंग का गुलाल जरूर लगाएं। यह सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक है।
  • इसके साथ ही भगवान विष्णु की भी विधिवत पूजा करें।
  • उन्हें आंवले का फल अर्पित करें और आंवले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं।
  • शिव जी को खीर या ठंडाई का भोग लगाएं।
  • अंत में एकादशी कथा, शिव चालीसा का पाठ करें। साथ ही मां पार्वती के वैदिक मंत्रों का जप करें।
  • अंत में आरती करें।


रंगभरी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद इसी दिन भोलेनाथ माता पार्वती को विदा कराकर अपनी नगरी काशी लाए थे। इसलिए भक्त इस दिन बाबा विश्वनाथ को अबीर और गुलाल अर्पित कर उनका स्वागत करते हैं। काशी में रंगभरी एकादशी से ही होली का पर्व शुरू होता है। इस दिन से लेकर अगले 6 दिनों तक काशी में भव्य होली खेली जाती है। साथ ही, इसी दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा भी की जाती है, जिसे आमलकी एकादशी कहते हैं।

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