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Mahashivratri 2026: बहुत खास होती है महाशिवरात्रि की रात, जानें इस रात का रहस्य और महत्व

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस पर्व में रात के चार पहर की पूजा का विशेष स्थान है। आइए जानें क्यों खास मानी जाती है महादेव की ये रात और क्या है इसका रहस्य

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 14, 2026 पर 2:55 PM
Mahashivratri 2026: बहुत खास होती है महाशिवरात्रि की रात, जानें इस रात का रहस्य और महत्व
महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत पावन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। त्रिदेव में से एक भगवान शिव, जिन्हें शास्त्रों सृष्टि के संहारक के रूप में वर्णित किया है, उन्हें ये पर्व समर्पित है। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल ये व्रत रविवार, 15 फरवरी 2026 को किया जाएगा। इस व्रत में भक्त पूरे दिन उपवास करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहती है और पूरा देश इस दिन शिवमय नजर आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये पर्व भगवान शिव को अति प्रिय है।

लिंग स्वरूप में प्रकट हुए भगवान 

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव पहली बार इसी रात को लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। यह लिंग अग्नि के एक विशाल स्तंभ के समान था, जिसका न तो कोई आदि था और न ही अंत। इसी कारण महाशिवरात्रि की रात को करोड़ों सूर्यों के तेज के समान माना जाता है।

शिव और शक्ति के मिलन की रात

कुछ अन्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि वह महापर्व है जब भगवान शिव और माता शक्ति का विवाह हुआ था। यह पुरुष और प्रकृति के मिलन की रात मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इसी रात शिव ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन अपनाया था, जो ब्रह्मांड के संतुलन के लिए बेहद जरूरी था।

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