Makar Sankranti 2026 Shubh Sanyog: सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। इस हिसाब से मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के राशि परिवर्तन का त्योहार होता है। इस दिन सूर्य भगवान धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। माना जाता है कि इस दिन के बाद से सर्दियों का मौसम विदा लेता है और वसंत ऋतु के आगमन की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति के बाद से दिन लंबे होने शुरू हो जाते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति का पर्व बेहद खास माना जा रहा है। इस साल यह पर्व एक-दो नहीं 6 शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। इसके अलावा सूर्य भगवान के मकर राशि में प्रवेश करने का वाहन भी हर साल बदल जाता है। आइए जानें इस साल सूर्य भगवान का वाहन क्या रहेगा ?
मकर संक्रांति पर बन रहे 6 शुभ संयोग
ध्रुव योग : मकर संक्रांति पर ध्रुव योग रात के समय में बन रहा है। यह भी एक शुभ योग माना गया है। इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र : मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे दिन ज्येष्ठा नक्षत्र है। इसके स्वामी ग्रह बुध और देवता इंद्र हैं। इस नक्षत्र को नेतृत्व, बुद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
वृद्धि योग : इस बार की मकर संक्रांति के दिन वृद्धि योग बन रहा है। इस योग में आप जो भी शुभ काम करेंगे, उसके फल में बढ़ोत्तरी होती है। मकर संक्रांति का स्नान और दान वृद्धि योग में ही होगा।
षट्तिला एकादशी पारण : मकर संक्रांति के दिन षट्तिला एकादशी का पारण भी है। जो लोग व्रत होंगे, वे सूर्योदय के बाद स्नान दान करके पारण करेंगे। उनको पुण्य लाभ होगा।
तिल द्वादशी या भीष्म द्वादशी : मकर संक्रांति के दिन माघ कृष्ण द्वादशी तिथि है। इसे तिल द्वादशी या भीष्म द्वादशी भी कहते हैं। इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान करना शुभ माना जाता है। तिल द्वादशी पर तिल का दान करना उत्तम होता है।
इस मकर संक्रांति का नाम, भगवान सूर्य का वाहन
इस साल की मकर संक्रांति का नाम मन्दाकिनी है। इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य पीले रंग का वस्त्र पहने बाघ पर सवार होंगे, उनका उपवाहन घोड़ा होगा। वे ईशान दृष्टि करके पश्चिम में गमन करेंगे। मकर संक्रांति पर उनका अस्त्र गदा है और वे भोग की अवस्था में होंगे। चांदी के पात्र में उनका भोज्य पदार्थ पायस है।