Mauni Amavasya 2026: इस बेहद दुर्लभ संयोग में स्नान दान का मिलेगा पर्वत बराबर फल, जानें क्या है यह योग और कब है माघी अमावस्या का स्नान?

Mauni Amavasya 2026: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस साल मौनी अमावस्या पर एक बहुत दुर्लभ योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में स्नान-दान करने वालों को पर्वत के समान फल की प्राप्ति होती है। आइए जानें क्या है ये योग

अपडेटेड Jan 17, 2026 पर 11:36 AM
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सूर्योदय के समय अमावस्या होने के कारण यह पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

Mauni Amavasya 2026: माघ मास की अमावस्या ही मौनी अमावस्या होती है। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन किया गया गंगा स्नान कई पीढ़ियों के पाप कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला होता है। वहीं मौनी अमावस्या पर दान करने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल मौनी अमावस्या पर एक साथ तीन बेहद दुर्लभ संयोगों का निर्माण हो रहा है, जिसमें स्नान-दान हजार अध्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल देगा। आइए जानें स्नान-दान की ये पावन अमावस्या कब होगी और कौन से हैं ये दुर्लभ योग, जिनके संयोग से अति पावन हो गया है मौनी अमावस्या का दिन?

मौनी अमावस्या तारीख

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 17 जनवरी, शनिवार की रात 12 बजकर 5 मिनट से प्रारंभ होगी और 18 जनवरी, रविवार की रात 1 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। पंचांग के अनुसार सूर्योदय के समय अमावस्या होने के कारण यह पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

दुर्लभ योगों का संयोग

इस दिन रविवार सुबह 10 बजकर 14 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसके अलावा हर्षण योग और शिव वास योग भी पूरे दिन बने रहेंगे। साथ ही पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा, यह समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस बार मौनी अमावस्या पर अर्धोदय योग का बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। स्कंदपुराण अनुसार इस योग में स्नान, दान आदि कार्य करने से मेरू समान फल प्राप्त होता है यानी पर्वत समान महान दान का फल मिलता है।

क्या है अर्धोदय योग?


मौनी अमावस्या तिथि पर इस बार रविवार और व्यतीपात योग होने से दुर्लभ अर्धोदय योग बनेगा। स्कंदपुराण में इस योग का बहुत महत्व बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, अर्धोदय योग में सभी स्थानों का जल गंगा के जल के समान हो जाता है। इस योग स्नान करने से सभी ब्रह्म के समान शुद्धात्मा वाले हो जाते हैं। इस योग में करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। इस दिन चांदी और स्वर्ण दान करने का भी बहुत खास महत्व होता है। ऐसे में आप सामर्थ्य अनुसार, किसी जरूरतमंद को स्वर्ण या चांदी का दान कर सकते हैं। पुराण के अनुसार, इस योग में गोदान, शय्यादान आदि जो भी देय द्रव्य हों वे तीन-तीन होने चाहिए। अर्धोदय योग के अवसर पर सतयुग में वसिष्ठजी ने, त्रेता में श्रीरामचंद्र जी ने, द्वापर में धर्मराज ने और कलियुग में पूर्णोदर ने कई प्रकार के दान धर्म किए थे। ऐसे में मौनी अमावस्या पर दान करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति हो सकती है।

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