Mauni Amavasya 2026: नोट कर लें मौनी अमावस्या की सही तारीख, पितृ दोष निवारण के लिए है बहुत शुभ दिन

Mauni Amavasya 2026: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र और महान तिथियों में से एक मानी जाती है। ये तिथि पितृ दोष निवारण के लिए भी उत्तम मानी जाती है। आइए जानें इसकी सही तारीख और पितृ दोष निवारण के लिए किए जाने वाले उपाय क्या हैं

अपडेटेड Jan 15, 2026 पर 7:00 AM
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माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहते हैं।

Mauni Amavasya 2026 date: मौनी अमावस्या की तिथि हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन दान-पुण्य करने से कई जन्मों के पाप से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृ शांति के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है। किसी के पितृ अगर नाराज हैं और जीवन के हर पड़ाव पर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे लोग मौनी अमावस्या पर पितृ शांति के लिए पिंडदान और तर्पण कर सकते हैं। इस दिन पितृ दोष निवारण के उपाय करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

कब है मौनी अमावस्या 2026?

पंचांग के अनुसार, माघ माह की अमावस्या तिथि रविवार, 18 जनवरी 2026 को दोपहर 12:03 बजे शुरू होगी और सोमवार, 19 जनवरी 2026 को दोपहर 1:21 बजे समाप्त होगी। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें?

गंगा जल से तर्पण

मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के संगम में स्नान करने और उसके बाद अपने पितरों का गंगा जल से तर्पण देना चाहिए। मान्यता है कि मोक्षदायिनी मां गंगा की कृपा से पितरों का उद्धार होगा। तर्पण के समय कुशा के पोरों से जल पितरों को तर्पित करना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।


त्रिपिंडी श्राद्ध

पितृदोष शांती के लिए काशी, गया या त्र्यंबकेश्वर में पितरों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराने की भी मान्यता है। कहा जाता है कि त्रिपिंडी श्राद्ध कराने से पितृदोष शांत हो जाता है। धार्मिक मान्यता है, कि त्रिपिंडी श्राद्ध अपने तीन पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए किया जाता है। इस श्राद्ध में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा का विधान है। श्राद्ध के समय पूर्वजों को अन्न से बनाया गया पिंड दान करना चाहिए।

अन्य उपाय

  • मौनी अमावस्या के दिन पितृसूक्त या पितृकवच का पाठ करना चाहिए, गीता के सातवें अध्याय का पाठ भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितृदोष मिटता है।
  • मौनी अमावस्या के दिन अन्न का दान या पितरों के लिए सफेद वस्त्र का दान कर सकते हैं। इसके लिए आप सफेद रंग के गरम कपड़ों का दान कर सकते हैं। इससे भी पितृदोष मिटता है।
  • मौनी अमावस्या की शाम सूर्यास्त के बाद पितर पितृलोक वापस लौटने लगते हैं। ऐसे में पितरों के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीपक जलाना चाहिए।

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