May Pradosh Vart 2026: ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

May Pradosh Vart 2026: ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत आज 14 मई को रखा जाएगा। यह दिन गुरु प्रदोष व्रत है, जिसका शुभ मुहूर्त शाम 7:09 बजे से रात 9:09 बजे तक रहेगा। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पापों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति आती है।

अपडेटेड May 14, 2026 पर 7:00 AM
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त्रयोदशी तिथि जिस दिन पड़ती है, उसके आधार पर प्रदोष व्रत का नाम तय होता है।

May Pradosh Vart 2026: प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस तरह, हर माह में यह व्रत दो बार आता है, यानी पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत होते हैं। त्रयोदशी तिथि जिस दिन पड़ती है, उसके आधार पर प्रदोष व्रत का नाम तय होता है। जैसे ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आज यानी गुरुवार के दिन पड़ रही है, इसलिए आज गुरु प्रदोष व्रत किया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और बृहस्पति ग्रह दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है। इस व्रत में सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

गुरु प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई 2026 की सुबह 11 बजकर 20 मिनट से हो रहा है, जो कि अगले दिन 15 मई 2026 की सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत उस दिन रखा जाता है, जब प्रदोष काल के समय त्रयोदशी तिथि व्याप्त हो। 14 मई को त्रयोदशी प्रदोष काल में है। इसलिए इस बार 14 मई 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 14 मई 2026 को गुरुवार का दिन है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त

14 मई 2026 को शाम 7 बजकर 9 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 9 मिनट तक प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं।

पूजा विधि


  • सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान शिव का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची आदि अर्पित करें।

प्रदोष काल पूजा

  • पुनः स्नान कर शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • घी का दीपक जलाकर शिव मंत्र, शिव चालीसा का पाठ करें।
  • मिष्ठान (शक्कर और घी से बने) का भोग लगाएँ।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरु प्रदोष व्रत केवल शिव उपासना नहीं, गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने का साधन भी है। इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में सुख-समृद्धि, ज्ञान और शांति आती है।

  • गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत "गुरु प्रदोष" कहलाता है।
  • मान्यता है कि इस दिन शिवजी की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं।
  • गुरु प्रदोष व्रत से शिव के साथ गुरु ग्रह (बृहस्पति) प्रसन्न होते हैं, जिससे ज्ञान, शिक्षा और करियर में प्रगति होती है।
  • इस व्रत को करने से धन, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य प्राप्त होता है।
  • शिव के नटराज स्वरूप की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

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