शारदीय नवरात्रि का शुभ आगाज आज से हो गया है और देशभर में भक्तों के बीच उत्साह का माहौल है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व शक्ति की उपासना का प्रतीक है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना या घटस्थापना से होती है, जिसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व में लोग व्रत रखते हैं, देवी के भजन-कीर्तन गाते हैं और घरों में सुंदर सजावट करते हैं। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं। भक्त मां से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
माना जाता है कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की सारी नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत संगम है।
पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। उनका पूजन घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री की कृपा से चंद्रमा से जुड़ी सभी अशुभ बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप
माता शैलपुत्री का रूप अत्यंत मनोहारी है। उन्होंने सफेद रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं, जो पवित्रता का प्रतीक हैं। उनकी सवारी वृषभ (बैल) है। दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल धारण कर वो भक्तों को शक्ति और शांति का आशीर्वाद देती हैं। उनका ये रूप सौम्यता और शक्ति का अद्भुत संगम है।
मां शैलपुत्री को खुश करने के लिए दूध और चावल से बनी खीर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सफेद रंग की मिठाइयां और सफेद फूल चढ़ाने से माता रानी प्रसन्न होती हैं। ये भोग न केवल मां को प्रिय है बल्कि घर में शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी लाता है।
मां शैलपुत्री के मंत्रों का महत्व
पूजन के समय विशेष मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
“या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥”
इन मंत्रों का उच्चारण श्रद्धा भाव से करने पर मन और घर दोनों में सकारात्मकता बढ़ती है।
नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। इस बार प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर यानी आज से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगी। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:50 से 9:08 बजे तक रहेगा। जो लोग अभिजित मुहूर्त में स्थापना करना चाहते हैं, उनके लिए समय सुबह 11:50 से दोपहर 12:38 बजे तक है।