Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार पांडु पुत्र भीम ने श्रीकृष्ण से पूछा था कि किस एकादशी व्रत को करने से पूरे साल की सभी एकादशी व्रत का फल मिल सकता है। तब भगवान कृष्ण ने भीम को इस एकादशी व्रत को करने का सुझाव दिया था, क्योंकि भीम पूरे साल की सभी एकादशी का व्रत नहीं कर पाते थे। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास जुड़ने की वजह से निर्जला एकादशी का व्रत आगे खिसक गया है। अधिक मास पूरा होने के बाद जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शुरू होगा, तब इस एकादशी का व्रत जून के अंत में किया जाएगा। अभी अधिक मास की पहली एकादशी यानी पद्मिनी एकादशी का आज व्रत है। इसके बाद परम एकादशी का व्रत आएगा। निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी कहा जाता है, क्योंकि इस एक एकादशी व्रत को करने से पूरे साल की एकादशी का पुण्य अर्जित किया जा सकता है। इसे सबसे कठिन उपवास भी माना जाता है, क्योंकि इसमें भक्त अन्न और जल दोनों त्याग देते हैं।
निर्जला एकादशी 2026 सही तारीख
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी के लिए ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून को शाम 06:12 बजे होगी और यह 25 जून को रात 08:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में सूर्योदय के साथ निर्जला एकादशी 25 जून को है, न कि 27 मई बुधवार को।
निर्जला एकादशी 2026 पर होगा रवि योग
निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त
इस दिन जो लोग व्रत रखेंगे, वे सुबह में 05:25 बजे से लेकर सुबह 07:10 बजे के बीच पूजा कर सकते हैं। इस समय में शुभ-उत्तम मुहूर्त रहेगा।
निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून शुक्रवार को किया जाएगा। उस दिन आप सूर्योदय यानि सुबह 5:25 बजे से लेकर सुबह 8:13 बजे के बीच कर सकते हैं।
कहा जाता है कि पूरे वर्ष में सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत कर लेने से सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी के दिन आप व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें। आपके सभी पाप मिट जाएंगे।