Papamochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचनी एकादशी का व्रत चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भक्त विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पूरे दिन उपवास करते हैं। कहते हैं कि पापमोचनी एकादशी का व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करने वाले भक्त को भगवान विष्णु अपनी शरण में ले लेते हैं। पापमोचनी एकादशी को पापों का शमन करने वाली एकादशी माना जाता है। पापमोचनी एकादशी के व्रत में ऋषि मेधावी कथा जरूर पढ़नी चाहिए, इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा और इसका क्या मुहूर्त है?
पापमोचनी एकादशी तिथि और मुहूर्त
ऋषि को आकर्षित करने में कामदेव ने अप्सरा मंजुघोषा का साथ दिया। धीरे धीरे संत अपनी तपस्या भूल गए और उसके प्रति आकर्षित हो गए। इसे बाद दोनों साथ रहने लगे और इसमें लगभग 57 वर्ष बीत गए। एक दिन अप्सरा ने ऋषि मेधावी से वापस लौटने की अनुमति मांगी। ऋषि मेधावी ने कहा कि तुम अभी आई हो और इतनी जल्दी वापस जाना चाहती हो। मैं तुम्हें जाने की अनुमति नहीं दे सकता। कुछ समय बाद अप्सरा ने फिर से घर लौटने की अनुमति मांगी। ऋषि ने कहा कि एक दिन और रुक जाओ, कल सुबह मैं अपनी पूजा और प्रार्थना पूरी कर लूंगा, उसके बाद तुम जा सकती हो।
अप्सरा रोने लगी और बोली कि आप हर बार यही कहते हैं, लेकिन अब मुझे अपने घर वापस जाना ही होगा। तब ऋषि मेधावी को एहसास हुआ कि उन्होंने अपने जीवन के इतने वर्ष इस अप्सरा के साथ बिताकर अपनी तपस्या नष्ट कर दी है। उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने अप्सरा को भूत रूप धारण करने का श्राप दे दिया। यह सुनकर मंजुघोषा रोने लगी और ऋषि से क्षमा मांगने लगी। वह श्राप से मुक्ति का उपाय पूछने लगी। तब ऋषि ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने का उपाय बताया। अपने पिता की आज्ञा से उन्होंने खुद भी ये एकादशी श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से दोनों ने पापमोचनी एकादशी का व्रत किया और अपने पापों से मुक्त हो गए।