Paush Purnima 2025 Upay: हिंदू धर्म में पौष के महीने को छोटा पितृ पक्ष माना जाता है। इसका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस महीने में सूर्य देव की उपासना और अर्घ्य देने से जीवन में उर्जा बनी रहती है और सकारात्मकता आती है। इस माह की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा का दिन भी अत्यंत पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन चंद्र देव का दर्शन और पूजन करने के साथ ही अर्घ्य देने चंद्र दोष शांत होता है और जीवन में शुभता का संचार होता है। पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने और पितरों की याद में तर्पण और दान करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है। साथ ही पितृ दोष में भी शांति मिलती है। पौष पूर्णिमा पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना भी विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है। भगवान सत्यनारायण की कथा करने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है। आइए जानें नए साल में पौष पूर्णिमा का व्रत किस दिन किया जाएगा?
इस बार पंचांग के मुताबिक पौष पूर्णिमा तिथि दो जनवरी को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी। वहीं इस तिथि का समापन तीन जनवरी को दोपहर तीन बजकर 32 मिनट पर होगा। ऐसे में पौष पूर्णिमा तीन जनवरी को मनाई जाएगी।
पौष पूर्णिमा पर ब्रह्म और इन्द्र योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आएगी। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाएंगे। ज्योतिष ब्रह्म और इन्द्र योग को शुभ मानते हैं।
सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 47 मिनट पर
सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 54 मिनट पर
चन्द्रोदय- शाम 05 बजकर 52 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 04 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 12 मिनट से 02 बजकर 56 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 52 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
पौष पूर्णिमा पर जरूर करें ये काम
इस दिन व्रत रखकर चंद्रदेव की आराधना करने से कुंडली से संबंधित चंद्र दोष भी शांत होता है। इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल, भोजन सामग्री या अपनी सामर्थ्य अनुसार धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। किसी पुरोहित से अपने पितरों का श्राद्ध करवाएं। उनका ध्यान करें और पितृ चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और पूर्वज भी तृप्त होकर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।