Paush Putrada Ekadashi 2025 Date: 30 या 31 दिसंबर किस दिन किया जाएगा साल की आखिरी एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख, व्रत के नियम, मुहूर्त और मंत्र

Paush Putrada Ekadashi 2025 Date: पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। आइए जानें इस व्रत की सही तारीख, व्रत के नियम, मुहूर्त और मंत्र

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 1:43 PM
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एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है।

Paush Putrada Ekadashi 2025 Date: पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो अपनी संतान की खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। पौष पुत्रदा एकादशी में 'पुत्रदा' शब्द का अर्थ ही बच्चों को देने वाला है। भक्तों का मानना है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान, शांति और सफलता से संबंधित इच्छाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत सही विधि-विधान से करने से जीवन में आ रही मुश्किलों से मुक्ति मिलती है और संपन्नता आती है।

पौष पुत्रदा एकादशी तारीख और समय

पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 30 दिसंबर को सुबह 7:50 बजे शुरू होगी और 31 दिसंबर को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 31 दिसंबर को किया जाएगा।

व्रत पारण की तारीख और समय

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के पारण का समय 31 दिसंबर को दोपहर 1:29 बजे से 3:33 बजे के बीच किया जाएगा।

चंद्रोदय : दोपहर 1:33 बजे


चन्द्रास्त : प्रातः 3:43 बजे (31 दिसम्बर)

पौष पुत्रदा एकादशी के मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 5:24 से 6:19 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:03 बजे से 12:44 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 2:07 बजे से 2:49 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:31 बजे से शाम 5:59 बजे तक

एकादशी पर क्या दान करें?

एकादशी पर दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पीले फल, अनाज, धन और वस्त्र दान करने से आर्थिक लाभ और खुशहाली आती है। यह भी माना जाता है कि एकादशी के दिन दान करने से जीवन से अभाव दूर हो जाते हैं।

पौष पुत्रदा एकादशी के मंत्र

पौष पुत्रदा एकादशी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली और सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जाती है। इस दिन इन मंत्रों का जाप करना लाभकारी माना जाता है।

संतान सुख के लिए

ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तन्यं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

सुख-समृद्धि के लिए

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

अच्छे भाग्य के लिए

मंगलम विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम् पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥

इन बातों का रखें ध्यान

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते चढ़ाएं, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
  • शाम के समय घी का दीपक जलाएं और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • बेहतर आध्यात्मिक परिणामों के लिए व्रत के दौरान केवल सात्विक भोजन ही खाएं।

Paush Putrada Ekadashi: आने वाली है साल की अंतिम एकादशी, जानें दान के नियम और व्रत कथा

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