Paush Putrada Ekadashi 2025 Upay: पौष पुत्रदा एकादशी पर कर लें ये उपाय, खुल जाएंगे किस्मत के दरवाजे

Paush Putrada Ekadashi 2025 Upay: पौष पुत्रदा एकादशी साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। इस एकादशी का व्रत संतान की खुशहाली के लिए किया जाता है। लेकिन इस दिन तुलसी से जुड़े कुछ उपाय करने से किस्मत के बंद दरवाजे भी खोले जा सकते हैं। आइए जानें इनके बारे में

अपडेटेड Dec 09, 2025 पर 7:00 AM
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पौष पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी के उपाय करने पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है।

Paush Putrada Ekadashi 2025 Upay: पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण मास में और एक बार पौष के महीने में। पौष के माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। ये तिथि माता लक्ष्मी और भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होती है। इसमें लोग अपनी संतान की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए व्रत करते हैं। वहीं, नि:संतान दंपति इस दिन संतान की कामना से व्रत करते हैं।

लेकिन पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत भग्य बदलने वाला भी होता है। इस दिन माता तुलसी से जुड़े कुछ उपाय करने से वो प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल सकते हैं। हिंदू धर्म में तुलसी माता को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। इसलिए एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े विशेष उपाय करने पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा बरसती है, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है।

तुलसी से जुड़े चमत्कारी उपाय

घी का दीपक : तुलसी के पास दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है। एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना चाहिए। लेकिन इस दीपक में कच्चे सूत की बाती का इस्तेमाल करें।

तुलसी की मिट्टी का तिलक : तुलसी की मिट्टी को माथे पर लगाना से दुर्भाग्य दूर होता है। साथ ही नौकरी में सफलता मिलती है। यह भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सरल तरीका है। एकादशी के दिन तुलसी की मिट्टी से अपने माथे पर तिलक लगाएं।

तुलसी और चावल का दान : एकादशी पर दान का बड़ा महत्व है। एकादशी के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को तुलसी के कुछ सूखे पत्ते और चावल का दान करें। ऐसा करने से आपकी तिजोरी हमेशा धन से भरी रहेगी।


'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ : तुलसी के पास बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होते हैं। ऐसे में एकादशी के दिन, तुलसी के पौधे के सामने बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इस दौरान दीपक जरूर जलाएं।

तुलसी और शालिग्राम का अभिषेक : शालिग्राम जी को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है। एकादशी पर तुलसी के साथ उनका अभिषेक करने से अटके हुए धन की प्राप्ति होती है। अगर आपके घर में शालिग्राम जी हैं, तो एकादशी पर उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और उनके ऊपर तुलसी दल अर्पित करें। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसलिए पूजा में उपयोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

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